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मानसखंड विज्ञान केंद्र, अल्मोड़ा में हरेला पर्व पर वृक्षारोपण एवं पर्यावरण संरक्षण संगोष्ठी का आयोजन


अल्मोड़ा, । उत्तराखंड के लोकपर्व हरेला के अवसर पर मानसखंड विज्ञान केंद्र, अल्मोड़ा में वृक्षारोपण एवं पर्यावरण संरक्षण विषयक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वसुंधरा फाउंडेशन अल्मोड़ा, भारत ज्ञान विज्ञान समिति (BGVS), महिला हाट अल्मोड़ा के स्वयंसेवियों तथा स्थानीय नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम की शुरुआत विज्ञान केंद्र परिसर में विभिन्न प्रजातियों के पौधों के सामूहिक वृक्षारोपण से हुई।
वृक्षारोपण के उपरांत विज्ञान केंद्र के सभागार में आयोजित संगोष्ठी का शुभारंभ डॉ. प्रियंका अधिकारी, उप प्रभारी, मानसखंड विज्ञान केंद्र, अल्मोड़ा ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए किया। उन्होंने हरेला पर्व के सांस्कृतिक एवं पर्यावरणीय महत्व पर प्रकाश डालते हुए सभी को पर्व की शुभकामनाएँ दीं।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि यूकॉस्ट के महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत ने सभी को हरेला पर्व की शुभकामनाएँ देते हुए मानसखंड विज्ञान केंद्र, अल्मोड़ा में उपलब्ध वैज्ञानिक एवं शैक्षिक सुविधाओं का अधिकाधिक लाभ उठाने का आह्वान किया।
भारत ज्ञान विज्ञान समिति, अल्मोड़ा के श्री प्रमोद तिवारी ने समिति की देशव्यापी गतिविधियों की जानकारी देते हुए बताया कि संस्था पूरे देश में पर्यावरण संरक्षण, जनजागरूकता तथा व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण के कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा रही है।
वसुंधरा फाउंडेशन, अल्मोड़ा के डॉ. रवीन्द्र जोशी ने हरेला पर्व से जुड़ी परंपराओं, हरेला में बोए जाने वाले विभिन्न प्रकार के बीजों, वृक्षारोपण के महत्व तथा लगाए गए पौधों के संरक्षण एवं देखभाल की आवश्यकता पर विस्तार से अपने विचार व्यक्त किए।
महिला हाट, अल्मोड़ा की श्रीमती गीता पांडे ने चितई गांव की प्रेरणादायक सफलता की कहानी साझा करते हुए बताया कि किस प्रकार स्थानीय लोगों ने सामूहिक प्रयास, वृक्षारोपण एवं पौधों की सुरक्षा के लिए बाड़बंदी कर जल संकट जैसी गंभीर समस्या का समाधान किया।
मानसखंड विज्ञान केंद्र, अल्मोड़ा के प्रभारी डॉ. नवीन चंद्र जोशी ने हरेला पर्व, जलवायु परिवर्तन तथा वृक्षारोपण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए पर्यावरण संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयासों का आह्वान किया।
एस.एस.जे. विश्वविद्यालय, अल्मोड़ा के शिक्षा विभागाध्यक्ष प्रो. रिजवाना सिद्दीकी ने पर्यावरण संरक्षण में प्रत्येक नागरिक की भूमिका पर बल देते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवनकाल में कम से कम 12 या उससे अधिक पेड़ अवश्य लगाने चाहिए।
इस अवसर पर यूकॉस्ट के एमेरिटस वैज्ञानिक डॉ. जी.सी.एस. नेगी ने प्रतिभागियों से संवाद करते हुए वृक्षारोपण के महत्व, पर्यावरण संरक्षण में वृक्षों की भूमिका तथा पौधों के संरक्षण एवं संवर्धन की आवश्यकता पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि केवल पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका नियमित संरक्षण और देखभाल भी उतनी ही आवश्यक है। उनके मार्गदर्शन में विभिन्न प्रजातियों के पौधों का वृक्षारोपण किया गया।
यूकॉस्ट (UCOST) के सलाहकार प्रो. वी.पी. पाण्डेय ने कहा कि पृथ्वी पर जल और ऑक्सीजन सबसे बहुमूल्य संसाधन हैं, जिनका संरक्षण मानव अस्तित्व के लिए अत्यंत आवश्यक है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ. विजया ढौंडियाल ने भारत ज्ञान विज्ञान समिति के कार्यों, वृक्षारोपण, कार्बन उत्सर्जन में कमी तथा पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता पर विस्तार से अपने विचार रखे।
कार्यक्रम के अंत में भारत ज्ञान विज्ञान समिति के श्री एस.डी. भट्ट ने सभी प्रतिभागियों एवं अतिथियों का आभार व्यक्त किया। मानसखंड विज्ञान केंद्र, अल्मोड़ा की ओर से श्री प्रदीप तिवारी ने सभी वक्ताओं एवं प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन श्री प्रदीप तिवारी द्वारा किया गया।
कार्यक्रम में श्री नीरज पंत, श्री अशोक पंत, एस.एस.जे. विश्वविद्यालय, अल्मोड़ा के संकाय सदस्य, विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, सुनौला, करक, मटेला की महिलाओ, स्वयंसेवी तथा बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।
हरेला पर्व के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम ने पर्यावरण संरक्षण, जल संवर्धन एवं वृक्षारोपण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने का प्रभावी संदेश दिया।

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