Shakti Samachar Online

साहित्य और कविता

भारतीय सिनेमा के सुपर स्टार डिस्को डांसर मिथुन चक्रवर्ती

दिनेश भट्ट अल्मोड़ा उत्तराखंड हिन्दी सिनेमा – बात करते हैं गोरांग चक्रवर्ती यानी मिथुन चक्रवर्ती। मिथुन चक्रवर्ती का जन्म 16जून सन् 1950 में कोलकाता के मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ

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अल्मोड़ा

दुल्हनें और दूल्हे: उपयुक्त जीवनसाथी खोजने का संकट -देवेंद्र कुमार बुडाकोटी

पिछले कुछ वर्षों में उत्तराखंड में माता-पिता और सोशल मीडिया पर होने वाली चर्चाओं में दुल्हन खोजने की कठिनाई बार-बार सामने आई है। एक आम चिंता “उपयुक्त लड़के” की तलाश

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अल्मोड़ा

पुस्तक-झंझाबात,बच्चों के लिए सबसे बड़ा दुख मां का ना होना ही होता है …..

समीक्षापुस्तक—झंझाबातलेखकमंडल–हरीश जोशीअचला जोशीअनुराग जोशी जोशी परिवार की विरह के प्रस्फुटन से उद्भूत भावनाएं झंझाबात के रूप में पढ़ने को प्राप्त हुई। वस्तुत:यह रचना पत्नी के असमय ही परलोक गमन के

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साहित्य और कविता

कामयाब:दिव्येश पांडे

कामयाब होना आसान नहीं,हर सफ़र में तूफ़ान नहीं,फ़र्क़ तो है कामयाबी में भी,और शिकस्त की सज़ा में भी। कभी लम्हे नाक़ाबिले-बर्दाश्त लगते,हर पल जैसे इम्तिहान सजते ।कुछ बाटीं चुभती हैं

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देहरादून

स्कूली बच्चों को डॉ. बृज मोहन शर्मा ने बताये खाद्य पदार्थों में मिलावट की जांच के सरल परीक्षण तरीके

देहरादून,13 अक्टूबर, 2025.आज दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र में स्पैक्स संस्था के सहयोग से एम.के.जे.एस.एम. स्कूल के 31 विद्यार्थियों के लिए एक रोचक विज्ञान प्रयोग सत्र आयोजित किया गया।बच्चों ने

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साहित्य और कविता

उत्तराखंड में विकास की चुनौतियाँ- देवेंद्र कुमार बुडाकोटी

उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में पारंपरिक रूप से आजीविका का मुख्य आधार आत्मनिर्भर कृषि रहा है, जिसे वानिकी और पशुपालन से सहारा मिलता रहा। आज़ादी के बाद बड़ी संख्या में

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अल्मोड़ा

रावण-बाणासुर तथा परशुराम -लक्ष्मण का अभिनय कर रहे कलाकारों ने सभी दर्शकों को मंत्र मुग्ध कर दिया।

Almora–श्री भुवनेश्वर महादेव मंदिर एवं रामलीला समिति कर्नाटक खोला अल्मोडा में तृृतीय दिवस की रामलीला में सीता स्वयंवर,रावण-बाणासुर तथा परशुराम-लक्ष्मण संवाद मुख्य आकर्षण रहे ।राम की पात्र रश्मि काण्डपाल,लक्ष्मण-कोमल जोशी,सीता-वैष्णवी

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साहित्य और कविता

पुस्तक समीक्षा: दास्तान-ए-सीमा प्रहरी समीक्षक: प्रभात उप्रेती (वरिष्ठ साहित्यकार)

वर्तमान में वर्दीधारियों ने अपने सेवाकाल के लौहमर्षक अनुभवों को लेकर अंग्रेज़ी में कई किताबें लिखी हैं। हिंदी में भी मेरी खाकी मेरा अभिमान जैसी पुस्तकें आई हैं, जिन पर

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