उत्तराखंड के मित्रों के नाम चिट्ठी
शुभ स्थान - अल्माड़
जेठ 16 पैट,
29 मई ,2026
सिद्धीश्री सर्वोपमा योग्यवर-6
आमा-बुबू, ठुल ईजा-ठुल बौज्यू, कका-काकी,ममा-मामी और सबै ठुला कैं म्येरि पैला और ननां कैं प्यार आशीष।
उत्तराखंड में अघिल साल हुणी विधान सभा चुनावै तैयारी में नेता लोग लागि रयीं। मुख्यमंत्री ज्यू एक दिन में तीन-चार जिलों में जाण रयीं। लोग बताण रयीं कि विकास बहुत हैगो। दुसार तरफ लोग सरकारि स्कूलों पर विश्वास नि करण राय। सरकारि अस्पताल रिफर सेंटर है गयीं। लोगूंल हाथ खुट छोड़ि हालीं। सब फ्री राशन और किसान पिल्सना चक्कर में छन। जैक चलण रै तो वी पिल्सन लै लागि जाणै। होटल वाल होम स्टे नाम पर अनुदान पचकाण रयीं। गरीब दुबाउ लोगों आधार कार्ड लै नि बणण रौय। बैंक वाल लै ठुल लोगों कैं लोन दिण रयीं। गरीब दुबाउ लोग बैंका डबल जम नि कर सक तो सीद कुड़की ऐ जाणै।
पहाड़ पन आज भोउ चुवार, आड़ु, खुमानी पाकि गयीं। अलबेर जंगोउ में काफो खूब है रयीं। नाशपति यानी गड़ मिहोव लै ठुल है गयीं। डान-कनां स्यो डाउ लुटि रयीं। तो गरम घाटी वाल जगां आमा डाउ पर खूब आम ऐ रयीं। बीच में क्वे-क्वे जगां खूब ढई-ढंचाउ ऐ पड़ौ। क्वे- क्वे जगां डाउ यानी ओलावृष्टि लै है पड़ी। य वजैल फल-फूलों कैं बहुत नुकसान है पड़ौ। रतै पर लाल-लाल हिसाउ पहाड़ पन मिलण रौ। अहा किल्मौड़ खै बे ओंठ और जिबड़ौ रंग बदई जाणौ। कौतिक में गीतार कूंछी – ‘किलमौड़ी झन खायै, गिच होली काई ।’ घरौं पन आज भोउ एक है एक फल चाखण में उणीं। नान छना गोरू ग्वाउ जांछिया तब भुख लै लागनै छी। किल्मौड़, हिसाउ और घिंघारू लै खूब खांछी। आब घरौं पन नान गोरू ग्वाउ जानी लै तो चिप्स लिजाण रयीं। पैली बटी ग्वाउ नान जागर, कौतिक और ब्या खेल करछी। आब सारै खेल मुबाइलमें है गयीं। नई जमना नान पुराण खेल क्ये लै नि समझन। बहरहाल घरौं पन हरी-परी साग चलि रौ। चुवौ साग खै बे बुड़-बाड़ि हाथ खुटां पर चड़ैक पड़ि जाणी। खुटां में खवाई है जाणै। रात हूं उड़भाड़ है जाणौ। रातै नीन हराम हैगे। रतै पौ फूटण यानी उज्याउ हुण पर आंख लागण रयीं।
हमर गौंक पंडि ज्यू बताण रयीं कि अलबेर जेठ में अधिकमास यानी पुरूषोत्तम मास छू। अधिकमास में नई काम नि है सकन कैै पंडि ज्यू बताण रयीं। य बीच गंगा दशहरा त्यार लै छी। हमार गौंक सभापति ज्यू बताण रयीं कि पैली बटी गंगा दशहरा मौक पर पंडि ज्यू आपुण हाथल रंगीन द्वार पत्र में भगवानै फोटक और मंत्र लेखि बे तैयार करछी। पंडि ज्यू लेखि मंत्र वाल द्वार पत्र जो घर में लागछी । उ घरै इफाजत भगवान करछी। उ घर पर असमान वाल बिजुलि यानी बज्र लै असर नि करछी बल। पंडि ज्यू लै धरम -करम वाल हूंछी। आब क्वे-क्वे पंडि ज्यू तो नाई में टोटिल है जाणी। कुकूर लै उनेरि इज्जत नि करण राय। आब अबै बजार पन एक है एक रंगीन द्वार पत्र मिलण रयीं। पंडि ज्यू द्वार पत्र कैं पतेसि बे जजमानौं कैं दिण रयीं। क्वे-क्वे पंडि ज्यू आजि लै आपुण हाथा बणाई रंगीन द्वार पत्र जजमानौं कैं दिण रयीं। य बहुत मेहनत वाल काम छू। पंडि ज्यू हाथा लिखी द्वार पत्रों कैं जादेत्तर लोग ल्याख नि लगाण राय। य वजैल पंडि ज्यू बजारा द्वार पत्र बांटण रयीं। नई जमना समझदार जजमान आपुण पंडि ज्यू कैं भलि दक्षिण दिणै रयीं। घरौं पन पुराण लोग आजि लै साउ पांच रुपै दक्षिण दिबे पंडि ज्यू हूं पाठ कराण रयीं। पंडि ज्यू फिर लै खुशि छन।
पहाड़ पन मौसमक क्ये अंदाज नि उण रौय। कै दिन द्यो छिट पड़ा तो भरखर चौमास जै है जाणौ। धुपरि कै पाथर उलई जाणी। जाग-जगां आग लागि बे धूर्यो है जाणै। उड़भाड़ जसै लागण रौ। हाय पाणि-हाय पाणि कै लोग परेशान है रयीं। पाणि नौ और धार सुखि गयीं। गध्यरां में लै पाणि नहां। पैली बटी लोग घरौं पन गरमी में खुश्याणि यानी मर्चा बोट लगाछी। भडु डाउ लगांछी। आज भोउ दूर-दूर तक पाणि नहां। जो जगां गाड़-गध्यरां में पाणि छू। वेति लोग मर्च,भडु डाउ रोपण रयीं। पीणा लिजी पाणि नहां। ग्वोर-भैंसौं लिजी पाणि नहां। डाई बोट तक क्वे पूंछौ। सरकारि नल में पाणि नहां। पाणि जड़ परै सुखि गो। नल कैं लोग बाट-घटै टोड़ि दिणी। पैली बटी रतै पुज पाठा लिजी ताजि पाणि ल्याओ कूंछी। आब नल में द्वि -तीन में पाणि उण रौ। आब अबै अलग-अलग डबा में पाणि धरि लीणी। उ डबा में अणबिटाई पाणि मानि बे लोग काम चलाण रयीं। पहाड़ा स्कूलों में गरमी छुट्टि पड़ि गयीं। 27 मई बटी 2 जून तक पहाड़ा स्कूलों में समर कैंप लगाओ कै फरमान सरकारल करि रौ बल। स्कूला मासैप समर कैंप बटी फोटो और वीडियो लै भेजण रयीं बल। समर केंप में छुट्टी दिनों में लै नना कैं भात मिलण रौ बल।
आज इतूकै लेखण रयूं। चिट्ठी ठुलि हैगे कै नराज झन हया। रोज सोचनू कि कम लेखूल। पर मनसुप जसै लागि जानी। चिट्ठी मिलि गे कै एक आंखर लेखि दीया। आज भोउ सबूं मुबाइल पर अनलिमिटेड प्लान हूंछ। एक आंखर लेखि दिला। तुमर मुबाइल घोइण जै क्ये रौ। चिट्ठी पढ़ि बे भल लागलौ तो इष्ट मितुरौं कै लै शेयर करि दीया। पहाड़ पन आपुण इज-बौज्यू और आम-बुब कै इकलै झन छोड़िया। गौं बाखई पन लोग बहुत मजाक बनानी। मरि बे पिपो पाणि और सराद में पंडि ज्यू कैं दान करि दिया। भलि बात छू। पर ज्यौन जी बुड़-बाड़ी कैं एक घुटुक चहा बखत पर मिलि जाओ, य जुगाड़ करि दिया। आज भोवा ब्वारी सास सौरन कैं जादे मुख नि लगाण राय। शिबौ बुड़-बाड़ि परेशन छन। भोल हमरि लै यसै गत्त होलि य समझि बे बुड़-बाड़ी स्याउ करि दिया। मौसम बददलण रौ। आपण ज्यानै हिफाजत करीया तबै पालना होलि। बांकि फिर लेखूल
तुमर मितुर,
उदय किरौला
संपादक बालप्रहरी
सचिव बालसाहित्य संस्थान
दरबारीनगर अल्मोड़ा उत्तराखंड