सोबन सिंह जीना इंस्टीट्यूट में मनाया गया विश्व हॉस्पिस एवं पैलिएटिव केयर दिवस 2026
अल्मोड़ा। सोबन सिंह जीना इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च सेंटर, अल्मोड़ा में विश्व हॉस्पिस एवं पैलिएटिव केयर दिवस 2026 के अवसर पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व दर्द एवं पैलिएटिव केयर विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. उर्मिला पलारिया ने किया।
कार्यक्रम के दौरान पैलिएटिव केयर के महत्व, गंभीर एवं असाध्य रोगों से पीड़ित मरीजों की देखभाल तथा उनके जीवन की गुणवत्ता बेहतर बनाने के विषय पर विशेष प्रस्तुति दी गई। प्रस्तुति में मरीजों को दर्द से राहत प्रदान करने, शारीरिक एवं मानसिक कष्ट कम करने तथा मरीजों और उनके परिजनों को भावनात्मक सहयोग देने के महत्व पर प्रकाश डाला गया।
इस अवसर पर डॉ. साइमा खान ने आकाशवाणी पर पैलिएटिव केयर विषय पर एक विशेष साक्षात्कार दिया। इसके माध्यम से आम जनमानस को पैलिएटिव केयर की आवश्यकता, इसके उद्देश्यों तथा गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए इसके महत्व के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया गया।
कार्यक्रम के अंतर्गत राजकीय मेडिकल कॉलेज, हल्द्वानी तथा स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ पैलिएटिव केयर के साथ ऑनलाइन ज़ूम बैठक भी आयोजित की गई। इस बैठक में विभिन्न चिकित्सा संस्थानों के बीच समन्वय, पैलिएटिव केयर सेवाओं के विस्तार तथा गंभीर एवं असाध्य रोगों से पीड़ित मरीजों को बेहतर, सुलभ और संवेदनशील देखभाल उपलब्ध कराने के महत्व पर चर्चा की गई। बैठक का उद्देश्य पैलिएटिव केयर के क्षेत्र में आपसी सहयोग को बढ़ावा देना तथा मरीज-केंद्रित स्वास्थ्य सेवाओं को और प्रभावी बनाना था।
कार्यक्रम में डॉ. साइमा खान, डॉ. करनजोत कौर एवं डॉ. उमंग शर्मा उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त नर्सिंग इंचार्ज, तकनीशियन तथा अन्य जूनियर डॉक्टरों ने भी सक्रिय सहभागिता की।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्यकर्मियों के बीच पैलिएटिव केयर के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों को सम्मानजनक, संवेदनशील एवं समग्र देखभाल उपलब्ध कराने के महत्व को रेखांकित करना था।
इस आयोजन के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि पैलिएटिव केयर केवल बीमारी के उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मरीजों के दर्द और कष्ट को कम करने, उनकी गरिमा बनाए रखने तथा जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। मरीजों और उनके परिजनों को शारीरिक, मानसिक, सामाजिक एवं भावनात्मक सहयोग प्रदान करना भी इसका अभिन्न अंग है।