कुलपति ने एबीवीपी का गमछा पहनकर दिया राजनीतिक पक्षधरता का खुला संदेश: कांग्रेस
अल्मोड़ा। सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय के कुलपति द्वारा सार्वजनिक कार्यक्रम में एबीवीपी का गमछा पहनने की तस्वीर सामने आने के बाद कांग्रेस ने विश्वविद्यालय प्रशासन और सरकार पर तीखा हमला बोला है।
जिला कांग्रेस कमेटी अल्मोड़ा के जिला महामंत्री निर्मल रावत ने कहा कि जिस कुलपति के कंधों पर पूरे विश्वविद्यालय को निष्पक्षता और समानता के साथ चलाने की जिम्मेदारी है, यदि वही व्यक्ति खुले मंच पर किसी राजनीतिक विचारधारा से जुड़े छात्र संगठन का गमछा पहनकर बैठेगा, तो इससे विश्वविद्यालय की निष्पक्षता और गरिमा पर गंभीर सवाल उठना स्वाभाविक है।
उन्होंने कहा कि कुलपति का पद किसी राजनीतिक दल या संगठन की शाखा का पद नहीं है। विश्वविद्यालय के मुखिया का इस तरह राजनीतिक संगठन के प्रतीक के साथ सार्वजनिक रूप से दिखाई देना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। यह केवल गमछा पहनने का मामला नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय प्रशासन की कथित राजनीतिक निष्पक्षता पर बड़ा सवाल है।
रावत ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि अब विश्वविद्यालयों की अकादमिक पहचान को भी राजनीतिक रंग में रंगने की कोशिश की जा रही है। जिस परिसर में छात्रों को लोकतंत्र, संविधान और स्वतंत्र विचार की शिक्षा मिलनी चाहिए, वहां यदि कुलपति ही राजनीतिक संगठन के प्रतीक को धारण करते नजर आएं तो यह पूरे शिक्षा तंत्र के लिए चिंता का विषय है।
उन्होंने कहा कि क्या अब विश्वविद्यालय में कुलपति की पहचान भी राजनीतिक संगठन के रंग से तय होगी? क्या एबीवीपी का गमछा पहनना विश्वविद्यालय के मुखिया की नई आधिकारिक वर्दी है? यदि नहीं, तो कुलपति को सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट करना चाहिए कि उन्होंने ऐसा क्यों किया।
कांग्रेस महामंत्री ने कहा कि विश्वविद्यालय में एनएसयूआई, एबीवीपी या किसी भी अन्य छात्र संगठन से जुड़े विद्यार्थियों के साथ समान व्यवहार होना चाहिए। लेकिन कुलपति स्वयं किसी एक संगठन के प्रतीक के साथ खड़े दिखाई देंगे तो बाकी छात्रों के मन में निष्पक्षता को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
उन्होंने कहा, “कुलपति को विश्वविद्यालय चलाना है, किसी राजनीतिक संगठन की विचारधारा का प्रचार नहीं करना है। सत्ता के दबाव में विश्वविद्यालयों की गरिमा से खिलवाड़ कांग्रेस किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगी।”रावत ने राज्य सरकार से सवाल किया कि क्या सरकार विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता और निष्पक्षता को बनाए रखने में विफल हो चुकी है? उन्होंने मांग की कि इस पूरे प्रकरण पर कुलपति से स्पष्टीकरण लिया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि विश्वविद्यालय प्रशासन किसी भी राजनीतिक संगठन के प्रभाव में काम न करे।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि विश्वविद्यालयों को राजनीतिक प्रयोगशाला बनाने की कोशिश की गई तो कांग्रेस सड़कों से लेकर विश्वविद्यालय परिसर तक इसका पुरजोर विरोध करेगी।