मेहनत, तकनीक और लगन से मत्स्य पालन बना समृद्धि की राह, यशपाल सिंह ने स्वरोजगार से बढ़ाई आत्मनिर्भरता
अल्मोड़ा, -जनपद के विकासखंड हवालबाग के ग्राम भाटनयालजूला, डाकघर मनान निवासी यशपाल सिंह ने वैज्ञानिक तरीके से मत्स्य पालन को अपनाकर ग्रामीण स्वरोजगार एवं आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने उपलब्ध जल संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए मत्स्य पालन को अपनी आजीविका का महत्वपूर्ण साधन बनाया है। उनकी इस पहल में उनकी पत्नी पुष्पा देवी एवं परिवार के अन्य सदस्य भी सहयोग कर रहे हैं।
यशपाल सिंह द्वारा कुल 16 मत्स्य पालन तालाब इकाइयों में मछली पालन किया जा रहा है। इन तालाबों में योजनाबद्ध एवं वैज्ञानिक तरीके से मत्स्य उत्पादन किया जाता है। मत्स्य बीज का उचित संचयन, गुणवत्तायुक्त आहार का प्रबंधन, तालाबों की नियमित साफ-सफाई तथा जल की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देकर उत्पादन को बेहतर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। उनके बेहतर प्रबंधन और निरंतर मेहनत का परिणाम है कि इन 16 तालाब इकाइयों से प्रतिवर्ष लगभग 8.00 कुन्तल मत्स्य उत्पादन प्राप्त हो रहा है।
यशपाल सिंह उत्पादित मछलियों का स्थानीय बाजार में विक्रय कर आय अर्जित कर रहे हैं। उपलब्ध विवरण के अनुसार, मत्स्य पालन से उन्हें लगभग ₹2.40 लाख की अनुमानित वार्षिक सकल आय प्राप्त हो रही है। इससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूती मिल रही है तथा स्वरोजगार के माध्यम से आजीविका के अवसर भी विकसित हुए हैं। सकल आय में से मत्स्य बीज, आहार, रखरखाव एवं अन्य संचालन संबंधी व्यय घटाने के बाद वास्तविक शुद्ध आय निर्धारित होती है।
मत्स्य पालन को अधिक प्रभावी बनाने के लिए यशपाल सिंह वैज्ञानिक तकनीकों एवं उचित प्रबंधन को महत्व देते हैं। तालाबों में मत्स्य बीज की उचित मात्रा, संतुलित आहार, जल की गुणवत्ता की निगरानी तथा मछलियों के स्वास्थ्य का नियमित ध्यान रखकर वे उत्पादन को बेहतर बनाए रखने का प्रयास कर रहे हैं। उनका अनुभव बताता है कि उपलब्ध जल संसाधनों का योजनाबद्ध एवं वैज्ञानिक उपयोग कर ग्रामीण क्षेत्रों में मत्स्य पालन को आयवृद्धि और स्वरोजगार का महत्वपूर्ण माध्यम बनाया जा सकता है।
यशपाल सिंह की सफलता अन्य किसानों एवं युवाओं के लिए भी प्रेरणादायी है। उनका प्रयास दर्शाता है कि पारंपरिक कृषि के साथ-साथ मत्स्य पालन जैसे आजीविका आधारित व्यवसायों को अपनाकर परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया जा सकता है। उनका लक्ष्य उपलब्ध तालाबों की क्षमता का बेहतर उपयोग करते हुए मत्स्य उत्पादन में वृद्धि करना तथा आधुनिक तकनीकों को अपनाकर इस व्यवसाय को और अधिक लाभकारी एवं टिकाऊ बनाना है। यशपाल सिंह की यह सफलता की कहानी ग्रामीण संसाधनों के सदुपयोग, मेहनत, वैज्ञानिक तकनीक और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक प्रेरणादायी मिसाल है।
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