शहीदों के सपनों से भटक गई है सरकार: उपपा
गैरसैंण राजधानी नहीं बनी, रोजगार-शिक्षा-पलायन के सवाल जस के तस
अल्मोड़ा। खटीमा-मसूरी गोलीकांड और जगदीश हत्याकांड की बरसी पर उत्तराखण्ड परिवर्तन पार्टी (उपपा) ने अल्मोड़ा के गांधी पार्क में धरना देकर प्रदेश सरकार की नीतियों के खिलाफ आक्रोश व्यक्त किया। पार्टी ने कहा कि शहीदों ने जिस जनपक्षीय, न्यायपूर्ण और आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड के लिए संघर्ष किया था, सरकार उस दिशा से पूरी तरह भटक गई है।
उपपा ने कहा कि 26 वर्ष बाद भी गैरसैंण को राज्य की स्थायी राजधानी न बनाया जाना सरकार की राजनीतिक इच्छाशक्ति पर सवाल है। रोजगार के अवसर पैदा करने के बजाय बेरोजगारी बढ़ रही है, शिक्षा व्यवस्था लगातार कमजोर हो रही है और पहाड़ से पलायन जारी है। सरकार के पास इन मूल सवालों का ठोस समाधान नहीं है।
पार्टी ने कहा कि किसान जंगली जानवरों के आतंक से फसल नहीं बचा पा रहे, पशुपालन संकट में है और पहाड़ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था लगातार कमजोर हो रही है। बंदर, लंगूर और जंगली सूअर से फसलों को हो रहे नुकसान ने किसानों को खेती से विमुख कर दिया है। इसका सीधा असर रोजगार, आजीविका और पलायन पर पड़ रहा है।
उपपा ने आरोप लगाया कि सरकार जनसरोकारों पर जवाबदेही तय करने के बजाय धर्म और पहचान की राजनीति को राजनीतिक मुद्दा बना रही है। पार्टी ने कहा कि उत्तराखण्ड को धार्मिक ध्रुवीकरण नहीं, बल्कि रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, गैरसैंण और स्थानीय संसाधनों पर आधारित विकास की जरूरत है।
धरने में खटीमा, मसूरी और मुजफ्फरनगर गोलीकांड के शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई। साथ ही 2022 में अंतरजातीय विवाह के कारण उपपा नेता जगदीश की हत्या के दोषियों को बिना किसी देरी के कठोरतम सजा देने की मांग की गई। वक्ताओं ने कहा कि जगदीश हत्याकांड सामाजिक न्याय और समानता के सवाल पर राज्य की गंभीर विफलता को सामने लाता है।
उपपा ने स्पष्ट किया कि शहीदों के सपनों का उत्तराखण्ड केवल नारे से नहीं, बल्कि गैरसैंण को राजधानी बनाने, रोजगार सृजन, शिक्षा-स्वास्थ्य की मजबूती, खेती-पशुपालन की रक्षा और पलायन रोकने की ठोस नीति से बनेगा।
धरने में उपपा के केंद्रीय महासचिव एडवोकेट नारायण राम, कौस्तुवानंद भट्ट, प्रकाश आर्या, किरण आर्या, वसीम अहमद, हीरा कोहली, विनीता, बलवंत नगरकोटी, भारती पांडे, पूजा सहित अनेक कार्यकर्ता मौजूद रहे।