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टिहरी के केतन हत्याकांड के विरोध में अल्मोड़ा गांधी पार्क में धरना-प्रदर्शन

अल्मोड़ा, टिहरी गढ़वाल में हुए निर्मम व जघन्य केतन हत्याकांड के विरोध में तथा मृतक केतन को न्याय दिलाने के लिए आज गांधी पार्क, अल्मोड़ा में उपपा कार्यकर्ता और सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ताओं द्वारा धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ अधिवक्ता गोविंद लाल वर्मा जी ने की। धरने को संबोधित करते हुए उपपा के संयोजक पी सी तिवारी ने कहा: 7 जून 2026 को लम्बगाँव, टिहरी के युवक केतन लाल की जिस बर्बरता से हत्या की गई, वह उत्तराखंड के माथे पर कलंक है। इस तरह की अमानवीय घटनाएं राज्य की अवधारणा के साथ खिलवाड़ हैं। यह किसी एक वर्ग का नहीं, पूरे समाज का मुद्दा है और समाज को एकजुट होकर इसका विरोध करना होगा। एक लड़की से दोस्ती के नाम पर केतन के पांव में कील ठोकी गई, नाखून उखाड़े गए और रातभर तड़पा-तड़पाकर मार डाला गया। यह ‘अमृत काल’ नहीं, यह आम नागरिकों, महिलाओं और कमजोर तबकों के लिए राहुकाल है। उन्होंने कहा कि इस तरह की तमाम घटनाओं पर पूरे समाज को गहराई से सोचने की जरूरत है और हर तरह की अमानवीय घटनाओं पर मुखर प्रतिरोध की ज़रूरत है।

धरने में वक्ताओं ने कहा कि केतन हत्याकांड कोई पहली घटना नहीं है।1980 में कफल्टा कांड और 1 सितम्बर 2022 को उत्तराखण्ड परिवर्तन पार्टी के नेता जगदीश की भी प्रेम विवाह के कारण हत्या कर दी गई थी। जगदीश से लेकर केतन तक, ऐसी घटनाएं बता रही हैं कि प्रशासनिक निष्क्रियता से अपराधियों के हौसले बढ़ रहे हैं और समाज में नफरत का माहौल बनाया जा रहा है।

इस पूरे दौर में उत्तराखंड में बढ़ते अपराध राज्य की अस्मिता के लिए संकट पैदा कर रहे हैं। पिछले 5 सालों में जगदीश, अंकिता और अब केतन हत्याकांड जैसे जघन्य अपराध हो चुके हैं जिन पर निष्पक्ष जांच की आवश्यकता है और न्याय मिलना चाहिए।

केतन हत्याकांड बता रहा है कि समाज के कमजोर तबकों को बराबरी और गरिमा का अधिकार नहीं दिया जा रहा है और उनके प्रति अपराध लगातार बढ़ रहे हैं। जन्म के आधार पर हर तरह के विभेद की मानसिकता को खत्म करने की ज़रूरत है। वर्ष 2019 में टिहरी के श्रीकोट में जीतेन्द्र दास, 2021 में चम्पावत में रमेश राम, चौकी गाँव में बबीता विश्वकर्मा, 2024 में देहरादून में एंजेल चकमा और हल्द्वानी में शुभम टम्टा पर हुए हमले इसी विभेदकारी, जातिवादी और पितृसत्तात्मक मानसिकता के उदाहरण हैं।

वक्ताओं ने आरोप लगाया कि व्यवस्था भी संवेदनहीन बनी हुई है। केतन के साथ गए दिवाकर को भी पीट-पीटकर अधमरा कर दिया गया, जिसका इलाज तक सरकार नहीं करा रही। जगदीश हत्याकांड में भी इंसाफ की प्रक्रिया धीमी रही और अब केतन के मामले में भी वही दोहराया जा रहा है।

धरने को वरिष्ठ अधिवक्ता गोविंद लाल वर्मा, उपपा की वरिष्ठ नेता आनंदी वर्मा, डॉ रेनू, मो. शाकिब, एड जीवन चन्द्र, एड पान, लल्लू लाल, हेम मिश्रा, किरन, भारती पांडे, ममता जोशी, विनीता आदि ने भी संबोधित किया। संचालन उपपा के महासचिव नारायण राम ने किया।

धरने की प्रमुख मांग:

  1. केतन हत्याकांड की फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई कर दोषियों को यथाशीघ्र कड़ी सजा दिलाई जाए।
  2. केतन के परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
  3. घायल दिवाकर के उपचार का खर्चा सरकार को उठाना चाहिए।
  4. जगदीश हत्याकांड सहित हिंसा के सभी मामलों में त्वरित न्याय दिया जाए।

वक्ताओं ने कहा कि केतन के लिए न्याय की यह लड़ाई किसी एक वर्ग की नहीं, बल्कि हर उस इंसान की है जो इंसानियत, बराबरी और न्याय में भरोसा रखता है।

धरने में डॉ प्रियंवदा, एड मनोज पंत, हेमा पांडे, विद्या कनवाल, अनीता बजाज, ममता बिष्ट, हीरा देवी, दीपांशु पांडे, कृष्णा, हरीश राम, मदन लाल, मोहन लाल टम्टा, गोपाल राम, निकिता, बद्रीश, अनीता कनवाल, एड गोपाल, नेहा, लता आदि सामाजिक, राजनीतिक कार्यकर्ता और छात्र शामिल रहे।

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