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उत्तराखंड के मित्रों के नाम चिट्ठी

            शुभ स्थान - अल्माड़
            जेठ 22 पैट, वृहस्पतिवार
             4 जून,2026  

सिद्धीश्री सर्वोपमा योग्यवर-6
आमा-बुबू, ठुल ईजा-ठुल बौज्यू, कका-काकी,ममा-मामी और सबै ठुला कैं म्येरि पैला और ननां कैं प्यार आशीष।
उत्तराखंड में अघिल साल चुनाव छन। य वजैल नेता लोग टकबकान है गयीं। य बीच अल्माड़ में राहुल गांघी ज्यू उणी छी। मौसम खराब है पड़ौ। उ नि ऐ सक। राहुल गांधी ज्यू कैं देखणा लिजी बहुतै लोग ऐ रछी बल। मुख्यमंत्री ज्यू लै आज भोउ जाग-जगां जाण रयीं। गरीब दुबाउ लोग आपुण फरियाद लिबे उनार पास मिलण हुं जानी। पर वर्दी वाल लोग उनूं कैं अघिल नि जाण दिन बल। उत्तराखंड में सरकारि स्कूलों पर लोग विश्वास नि करण राय। अस्पताल लै रिफर सेंटर है गयीं। सरकारल मोहान दवाई फैक्टरी लै प्राइवेट हाथों में दि हाली बल। मुख्य मंत्री ज्यू और दुसार नेता लोग प्राइवेट स्कूल और प्राइवेट अस्पतालों उद्घाटन करण में लागि रयीं। हमार गौंक सभापति ज्यू कूनी कि प्राइवेट स्कूल, प्राइवेट अस्पताल और दुसार ठुल दुकानदार नेता लोगों कें चुनाव बखत ढेपू दिनी। य लिजी नेता लोग सरकारि स्कूल और सरकारि अस्पताल है जादे प्राइवेट स्कूल और प्राइवेट अस्पतालों कें बढ़ावा दिण रयीं। उत्तराखंड में कंट्रोला दुकानों में फ्री राशन मिलणै रौ। लोगूंल खेति पाति छोड़ि हाली। सरकारि कागजौं में खेति-पाति करणी लोग पैली है जादे है गयीं। बुड़-बाड़ी कैं वृद्धा पिल्सन, विधवा कैं विधवा पिल्सन, नौकरी चाकरी वालों कैं सबूं कैं पिल्सन मिलणै रै। मोदी ज्यू राज में आब जो बचि गयीं। सबूं कैं किसान पिल्सन मिलण रै। लोग मोदी ज्यू जै-जै कारी करण रयीं। पहाड़ पन लै मोदी ज्यू-मोदी ज्यू हैरै। हमार गौंक सभापति ज्यू कूणी कि सरकार तो गरीब दुबाउ लोगों लिजी खूब काम करण रै। जो लोग दिल्ली में होटल में काम करण रयीं। मनरेगा में बगैर काम करियै उनरि मजूरी खात में जम है जाणै। माल बाखई शिबू अल्माड़ में ठुलि दुकान चलाण रौ। वी खात में किसान पिल्सन जाण रै। सब खुशि है रयीं। हरी लंबू नाम पर जमीन नहां। वी आधार कार्ड लै नि बनण रौय। सारै गौं खेति उ कमाण रौ। पर किसानी पिल्सन में वी नाम नहां।
पहाड़ पन ‘होम स्टे’ योजना चलि रै। होम स्टे नाम पर अनुदान लै मिलि जाणौ। मकान लै तैयार है जाणौ। ठुल होटल वालूंल लै अनुदाना चक्कर में आपुण होटल कैं ‘होम स्टे’ नाम दि हालौ। घरौं पन लै आब सबै पढ़ी-लिखी होश्यार है गयीं। मुर्गी बाड़ा और बकरी बाड़ा में आपुण तरफ बटी ढिल ढेपू लगै बे भल मकान लोग बनाण रयीं। सड़का नजिका लोग तो बकरी बाड़ा वाल मकान कैं भल बणै बे स्कूली नना कैं किराय पर लगाड़ रयीं। घरौं पन जादेत्तर लोग देस-परदेस या शहर बजार में मकान बणै बे रूण रयीं। जादेत्तर लोगूंल पितर कुड़ि छोड़ि हाली। जो लोगूंल पितर कुड़ि दुबार ठीक बणै रछी। वी धुरी बांस लै टुटि गयीं। घरौं पन पुराण मकान खनार है गयीं। सिसौणा बुज घर भतेर जामि गयीं। जो लोग घर छोड़ि बे दिल्ली या दुसार जगां न्है गयीं। उनूकैं पहाड़ै बहुत चिंता है रै। दिल्ली , मुबई और दुसार ठुल जगां लोग ब्याल बखत घुटुक-घाटुक लगै बे पहाड़ा बार में बहुत सोचनी बल। सुणाई में ऐरे कि उ लोग घुटुक घाटुक लगै बे डाड़ मारनी बल कि ‘पहाड़ को शराब ने उजाड़ दिया है। पहाड़ खाली हो गए हैं’। पर हमार पहाड़ में जो लोग आपुं कैं उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी बतौनी उ कथित आंदोलनकारी आपुण पिल्सना लिजी लागि रयीं। जनता जर्नादनै समस्या लिजी उ क्ये लै नि करण राय।
पहाड़ पन अलबेर मौसम खटमधुर जसै हैरौ। अलबेर पहाड़ौ मौसम न चौमास जसै न रूड़ जसै। ह्यौन जसै ठंड है जाणौ। चड़कैल घाम लागौ तो समझो रूड़ पड़ि जाणै। चौमास जसै द्यो है जाणौ। धान रूपाई वाल खेतन में पाणि डबडबान भरी रौ। खेत हरी-भरी देखीण रयीं। मडु झुंगौर क्वे-क्वे जगां गोड़णी हैगो। जो जगां ट्रैक्टर चलि रयीं। वेति काम कम हैगो। ट्रैक्टर लै आब घरौं पन नई रूजगार हैगो। पैली बटी बामण ज्यू नान-तिन हौ बाण में भिंद करछी। आब बामण ज्यू ननाल गौं में तीन चार ट्रैक्टर धरि रयीं। ठुल घोति वाल पंडि ज्यू नान लै टैक्टर चलाण रयीं। हमर गौंक धनी ल्वार मरी बाद घरौं पन आंफर लै बंद है गयीं। हमार गौंक सभापति ज्यू कूणी कि जमान बदली गो। आब पढ़ि नान तिन वैल्डिग वाल काम करण रयीं। फर्नीचर मार्ट वाल काम करण रयीं। घरौं पन पैली बटी मकान चिड़णी मिसतिरि हूंछी। मिस्त्री नान सब दिल्ली में होटल में नौकरी करण रयीं। बिहारि लोग घरौं पन कुड़-बाड़ि बनाण रयीं। पहाड़ा पढ़ी-लिखी नान लै दिल्ली में होटलों में काम करण रयीं। घरौं पन य बीच गैस सिलेंडर मिलणै रौ। आब पैली जसै हकाहक नि है रयि। जादेत्तर लोगूंल आपुण घर में बिजुली इंडैक्शन लै लि हालौ। अधमास में ब्या काज और शुभ काम नि हुण राय। पर घरौं पन रौखाई और चौबाट में खिचड़ि दिण चलियै छू। पहाड़ पन समझो दै दूदै इफरैत हैरै। पैली बटी घुटुक घाटुक लगाणी लोग ब्याल बखत दूर बजार जांछी। सरकारल जाग-जगां ठ्याक खोलि हाली। सब खुशि है रयीं। घरौं पना कम पढ़ी लिखी लोग आपुण रव्टां जुगाड़ में लागि रयीं। पढ़ी लिखी लोग कां बटी फैद हुं य सोचण रयीं। नेता लोग आपुण चुनावा लिजी ढेपू जम करण में लागि रयीं। पहाड़, पहाड़ै राजधानी पहाड़ में, कुमाउनी और गढ़वालि भाषा लीजि क्वे नि सोचण राय।
आज इतूकै लेखण रयूं। चिट्ठी ठुलि हैगे कै नराज झन हया। रोज सोचनू कि कम लेखूल। पर मनसुप जसै लागि जानी। चिट्ठी मिलि गे कै एक आंखर लेखि दीया। आज भोउ सबूं मुबाइल पर अनलिमिटेड प्लान हूंछ। एक आंखर लेखि दिला। तुमर मुबाइल घोइण जै क्ये रौ। चिट्ठी पढ़ि बे भल लागलौ तो इष्ट मितुरौं कै लै शेयर करि दीया। पहाड़ पन आपुण इज-बौज्यू और आम-बुब कै इकलै झन छोड़िया। गौं बाखई पन लोग बहुत मजाक बनानी। मरि बे पिपो पाणि और सराद में पंडि ज्यू कैं दान करि दिया। भलि बात छू। पर ज्यौन जी बुड़-बाड़ी कैं एक घुटुक चहा बखत पर मिलि जाओ, य जुगाड़ करि दिया। आज भोवा ब्वारी सास सौरन कैं जादे मुख नि लगाण राय। शिबौ बुड़-बाड़ि परेशन छन। भोल हमरि लै यसै गत्त होलि य समझि बे बुड़-बाड़ी स्याउ करि दिया। मौसम बददलण रौ। आपण ज्यानै हिफाजत करीया तबै पालना होलि। बांकि फिर लेखूल
तुमर मितुर,
उदय किरौला
संपादक बालप्रहरी
सचिव बालसाहित्य संस्थान
दरबारीनगर अल्मोड़ा उत्तराखंड

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