Shakti Samachar Online

विविध

वृद्धाश्रम: भारतीय पारिवारिक संरचना पर संकट

– देवेंद्र के. बुडाकोटी उत्तराखंड सरकार द्वारा राज्य के हर ज़िले में वृद्धाश्रम खोलने की हालिया घोषणा ने मुझे, एक समाजशास्त्री के रूप में, यह सोचने पर विवश किया कि

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भारत पर अमेरिकी टैरिफ और ऊर्जा सुरक्षा:देवेंद्र कुमार बुडाकोटी

ट्रंप प्रशासन द्वारा भारत से निर्यातित वस्तुओं पर 50% टैरिफ लगाना, रूस से भारत के कच्चे तेल आयात के जवाब में, एक संकीर्ण और असंगत नीति को दर्शाता है। भारत

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नई शिक्षा नीति 2020 के माध्यम से समाज का डी-स्कूलिंग:देवेन्द्र कुमार बुडाकोटी

1971 में प्रकाशित अपनी प्रसिद्ध पुस्तक Deschooling Society में इवान इलिच ने एक ऐसे समाज कीकल्पना की थी जहाँ शिक्षा आत्म-निर्देशित, सभी के लिए सुलभ और जीवन के दैनिक अनुभवों

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उत्तराखंड

क्या भ्रष्टाचार मानव डीएनए (DNA) में है: देवेन्द्र कुमार बुडाकोटी

“भारत में बहुत भ्रष्टाचार है”—यह भावना अक्सर भारतीयों द्वारा व्यक्त की जाती है। आमतौर पर यहआलोचना राज्य तंत्र और उसे चलाने वाले अधिकारियों पर केंद्रित होती है, चाहे वे उच्चतम

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आवारा कुत्तों की समस्या: सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष एक मुद्दा:देवेन्द्र कुमार बुडाकोटी

भारत में अधिकांश बड़े मुद्दे—चाहे वे नीति से जुड़े हों या अधिकारों से—अंततः सर्वोच्च न्यायालय की चौखट तक पहुंचते हैं। आश्चर्य की बात है कि स्थानीय निकायों से जुड़े आवारा

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न्यायविदों द्वारा प्रशासकों की खिंचाई: प्रभात उप्रेती

ऊँट पहाड़ के नीचे आ ही जाता है।जनता पुलिस, डॉक्टर और प्रशासकों से वैसे ही परेशान रहती है। इसलिए जब कभी कोई न्यायविद इनकी क्लास लेता है तो जनता गदगद

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विविध

उजड़ा पर्यटन

ये है ज़िंदगी का रेला-पेला, किसी ने खेला, किसी ने झेला शक्ति के इस खेल में फूलों की साज़िश है, कांटे बदनाम हैं। महफ़िल सूनी है, जाम खाली हाथ हैं।

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विविध

उत्तराखंड में पंचायत चुनाव: भारत में जमीनी लोकतंत्र की तस्वीर

देवेन्द्र कुमार बुडाकोटी भारत में लोकतांत्रिक शासन की परंपरा प्राचीन काल से रही है। वैशाली गणराज्य को इसका प्रमुख उदाहरण माना जाता है। इसी तरह, आज के ग्रामीण भारत में

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उत्तरकाशी

जब नदी अपने घर लौट आई — धराली की त्रासदी से निकला एक पुराना सबक

रिपोर्ट: डाo परितोष उप्रेती धराली — हर्षिल घाटी का वह छोटा-सा गाँव, जहाँ खीर गंगा की कल-कल धारा मानो लोरी-सी गुनगुनाती है। यही गाँव मंगलवार की दोपहर पर एक आवाज़

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