मानसखण्ड विज्ञान केंद्र में वृक्षारोपण एवं जैव विविधता संरक्षण पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित
अल्मोड़ा, 4 अगस्त। पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण के प्रसार के उद्देश्य से मानसखण्ड विज्ञान केंद्र, अल्मोड़ा एवं उत्तराखण्ड वन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार को मानसखण्ड विज्ञान केंद्र परिसर स्थित जैव विविधता पार्क (बायोडायवर्सिटी पार्क) में वृक्षारोपण एवं जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न प्रजातियों के पौधों का रोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया तथा विशेषज्ञों ने जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता संरक्षण और स्थानीय प्रजातियों के महत्व पर विस्तार से विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) सिविल एवं सोयम, अल्मोड़ा के औपचारिक स्वागत के साथ हुआ। इस कार्यक्रम में बैंस, उतीस, भीमल, तेजपत्ता, कचनार, हरड़, बहेड़ा, आदि सहित चौड़ी पति के लगभग ५० पौंधो का रोपण वैज्ञानिक रोपण किया गया उपस्थित सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों ने पौधों के संरक्षण एवं उनके नियमित संवर्धन का संकल्प लिया।
स्वागत संबोधन देते हुए डॉ. प्रियंका अधिकारी, उपप्रभारी, मानसखंड विज्ञान केंद्र, अल्मोड़ा ने केंद्र की स्थापना के उद्देश्य, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में संचालित विभिन्न कार्यक्रमों तथा विद्यार्थियों एवं आमजन में वैज्ञानिक सोच विकसित करने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मानसखंड विज्ञान केंद्र में विकसित जैव विविधता पार्क का उद्देश्य केवल पौधों का संरक्षण करना ही नहीं, बल्कि स्थानीय वनस्पतियों, औषधीय पौधों एवं पारिस्थितिक तंत्र के प्रति विद्यार्थियों, शोधार्थियों और आम नागरिकों में जागरूकता उत्पन्न करना भी है। उन्होंने कहा कि यह पार्क प्रकृति शिक्षा का एक जीवंत प्रयोगशाला के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहाँ आगंतुक स्थानीय जैव विविधता को निकट से समझ सकेंगे।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. जी.सी.एस. नेगी ने “उत्तराखण्ड में वृक्षारोपण : प्रजाति चयन, स्थल उपयुक्तता एवं प्रबंधन” विषय पर विस्तृत व्याख्यान एवं प्रस्तुति दी। उन्होंने कहा कि सफल वृक्षारोपण केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके लिए क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों, जलवायु, मिट्टी, वर्षा तथा स्थानीय पारिस्थितिकी के अनुरूप उपयुक्त प्रजातियों का चयन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने वैज्ञानिक पद्धतियों से पौधरोपण, पौधों की सुरक्षा, सिंचाई, संरक्षण तथा दीर्घकालिक प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने स्थानीय प्रजातियों के संरक्षण को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने का महत्वपूर्ण माध्यम बताया।
मुख्य अतिथि प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) सिविल एवं सोयम, अल्मोड़ा ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय में बढ़ते पर्यावरणीय संकट, जलवायु परिवर्तन तथा प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव को देखते हुए वृक्षारोपण और जैव विविधता संरक्षण अत्यंत आवश्यक हो गया है। उन्होंने उत्तराखण्ड वन विभाग द्वारा संचालित विभिन्न संरक्षण कार्यक्रमों, जनसहभागिता आधारित योजनाओं तथा वन पंचायतों की भूमिका पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पौधारोपण तभी सार्थक होगा जब लगाए गए पौधों का संरक्षण और नियमित देखभाल सुनिश्चित की जाए। उन्होंने युवाओं एवं विद्यार्थियों से पर्यावरण संरक्षण के अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया।
यूकॉस्ट (UCOST) के सलाहकार प्रो. वी.पी. पाण्डे ने अपने संबोधन में पौधों एवं वनों के पारिस्थितिक, आर्थिक तथा सामाजिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वृक्ष पृथ्वी पर जीवन के आधार हैं। उन्होंने बताया कि पौधे न केवल ऑक्सीजन प्रदान करते हैं, बल्कि जल संरक्षण, मृदा संरक्षण, जैव विविधता के संरक्षण तथा जलवायु संतुलन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कार्यक्रम में श्री मनोज सनवाल (रेडक्रॉस सोसायटी) ने पर्यावरण संरक्षण को सामाजिक दायित्व बताते हुए सामुदायिक सहभागिता की आवश्यकता पर बल दिया। वहीं डॉ. रवीन्द्र जोशी (वसुंधरा, अल्मोड़ा) ने जैव विविधता संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग तथा स्थानीय समुदायों की सहभागिता को पर्यावरण संरक्षण की सफलता की कुंजी बताया। उन्होंने कहा कि प्रकृति के साथ संतुलित जीवनशैली अपनाकर ही आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित एवं समृद्ध पर्यावरण सुनिश्चित किया जा सकता है।
इस अवसर पर मानसखंड विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक, तकनीकी एवं प्रशासनिक कर्मचारी, उत्तराखण्ड वन विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी, वन पंचायत प्रतिनिधि, पर्यावरण प्रेमी तथा अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने जैव विविधता पार्क का अवलोकन भी किया तथा विभिन्न पौध प्रजातियों एवं उनके संरक्षण संबंधी जानकारी प्राप्त की।
कार्यक्रम का समापन पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन तथा अधिकाधिक वृक्षारोपण के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ। आयोजकों ने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार के संयुक्त कार्यक्रम समाज में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने, स्थानीय जैव विविधता के संरक्षण तथा वैज्ञानिक सोच के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर श्री प्रदीप तिवारी ने आभार ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए कार्यक्रम की सफलता में सहयोग देने वाले सभी व्यक्तियों एवं संस्थाओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री प्रदीप धौलखंडी, प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) सिविल एवं सोयम, अल्मोड़ा, डॉ. प्रियंका अधिकारी, सह प्रभारी, मानसखण्ड विज्ञान केंद्र, अल्मोड़ा, डॉ. नवीन चन्द्र जोशी, केंद्र प्रभारी, मानसखण्ड विज्ञान केंद्र, अल्मोड़ा, एमेरिटस वैज्ञानिक डॉ. जी.सी.एस. नेगी, तथा प्रो. दुर्गेश पंत, महानिदेशक, यूकॉस्ट (उत्तराखण्ड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद), सभी विशिष्ट वक्ताओं, वन विभाग के अधिकारियों, वन पंचायत प्रतिनिधियों तथा कार्यक्रम में उपस्थित सभी प्रतिभागियों का बहुमूल्य समय देकर कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए हार्दिक धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने मानसखंड विज्ञान केंद्र, अल्मोड़ा के समस्त वैज्ञानिकों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों, उत्तराखण्ड वन विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया।