डॉ.प्रताप बिष्ट, राजकीय महाविद्यालय, भिकियासैण में “ऑनलाइन शिक्षा एवं सामाजिक असमानता” विषय पर आयोजित किया गया, विशेष व्याख्यान कार्यक्रम
आज दिनांक 21.9.2026 को महाविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग की समाजशास्त्र परिषद द्वारा, विषय “ऑनलाइन शिक्षा एवं सामाजिक असमानता पर एक विशेष व्याख्यान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता के रूप मे इंस्टीट्यूट आफ डेवलपमेंट स्टडीज, देहरादून के चेयरपर्सन ,डॉ.देवेंद्र बुडाकोटि, द्वारा मुख्य वक्ता के रूप मे, महाविद्यालय के विद्यार्थियों को व्याख्यान दिया गया।
उन्होंने अपनी व्याख्यान में बताया कि 21वीं सदी को सूचना प्रौद्योगिकी की सदी कहा जाता है। पिछले एक दशक में और विशेषकर कोविड-19 महामारी (2020-22) के बाद भारत में शिक्षा का स्वरूप पूरी तरह बदल गया है। ब्लैकबोर्ड की जगह स्मार्टफोन और कक्षा की जगह Zoom Meet ने ले ली है। सरकार ने इसे बढ़ावा देने के लिए SWAYAM, DIKSHA, PM e-Vidya, स्वयं प्रभा जैसे कई कार्यक्रम शुरू किए। लेकिन इस चमकदार तस्वीर के पीछे अंधेरा पक्षी है जैसे, सामाजिक असमानता। उन्होंने विभिन्न प्रकार की सामाजिक असमानताओं के बारे में विस्तार से चर्चा की जैसे आर्थिक असमानता,लैंगिक असमानता, ग्रामीण-शहरी असमानता, जातिगत असमानता एवं गुणवत्ता और भाषा की असमानता। उन्होंने इस असमानता के दुष्परिणाम जैसे- ड्रॉपआउट दर में वृद्धि,बेरोजगारी का खतरा यानी जिसके पास डिजिटल स्किल नहीं, वह नई अर्थव्यवस्था में पीछे रह जाएगा जैसे दुष्परिणामों पर भी विस्तार पूर्वक चर्चा की। उन्होंने ऑनलाइन शिक्षा एवं सामाजिक असमानता को कम करने हेतु सुझाव भी बताएं ,जैसे साझा संसाधन केंद्र का निर्माण ,जिसके अंतर्गत हर ग्राम पंचायत और नगर पंचायत में एक “डिजिटल शिक्षा केंद्र” बनाया जाए, जहां 10 कंप्यूटर, फ्री वाई-फाई और बिजली हो और छात्र वहां आकर पढ़ सकें। हाइब्रिड मॉडल को अपनाना , जिस मे की पूरी तरह ऑनलाइन नहीं, बल्कि 50% ऑफलाइन + 50% ऑनलाइन माध्यम द्वारा अध्ययन किया जा सके ।
मातृभाषा में सामग्री SWAYAM और DIKSHA पर हर कोर्स हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं में होना चाहिए।शिक्षकों और माता-पिता का प्रशिक्षण होना चाहिए जिसमें की ,शिक्षकों को सिखाया जाए कि वे कैसे गरीब छात्रों को फोन पर ही बेहतर पढ़ा सकते हैं। माता-पिता को भी जागरूक किया जाए कि, बेटा-बेटी में फोन को लेकर भेदभाव न करें। सामुदायिक निगरानी के माध्यम से, NSS और नेहरू युवा केंद्र के स्वयंसेवक घर-घर जाकर देखें कि कौन सा बच्चा ,ऑनलाइन पढ़ाई से छूट रहा है और उसे डिजिटल शिक्षा केंद्र तक लाएं। उन्होंने बताया कि “डिजिटल इंडिया” के साथ “समावेशी इंडिया” का लक्ष्य भी होना चाहिए। तकनीक तभी वरदान है जब वह अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक पहुंचे। अन्यथा, ऑनलाइन शिक्षा ज्ञान का दीपक नहीं, बल्कि असमानता का नया हथियार बन जाएगी। कार्यक्रम के अध्यक्षता महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य, डॉ.मनप्रीत सिंह द्वारा की गई। कार्यक्रम का संचालन समाजशास्त्र विभाग प्रभारी , डॉ. इला बिष्ट द्वारा किया गया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के विद्यार्थी, प्राध्यापक एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।