उत्तराखंड के मित्रों के नाम चिट्ठी
शुभ स्थान – अल्माड़
सौंण 8 पैट, वृहस्पतिवार
23 जुलाई ,2026
सिद्धीश्री सर्वोपमा योग्यवर-6
आमा-बुबू, ठुल ईजा-ठुल बौज्यू, कका-काकी,ममा-मामी और सबै ठुला कैं म्येरि पैला और ननां कैं प्यार आशीष।
उत्तराखंड में लै लोग राम मंदिरा डबल चोरिया क्वीड़ करण रयीं। इथां उत्तराखंडा मंदिरों में लै चढ़ावा डबलूं हेरा-फेरी हुणै बात चलि रै। हमार गौंक सभापति ज्यू कूनी भ्यारा देखण में सब ईमानदार छन। जै चोरि पकड़ी गयीं तो लोग उहै बेमान कूनी। उत्तराखंड में आज भोउ जाग-जगां सड़क टुटि जाणै। सरकारल जाग-जगां बुडलोजर धरि रयीं। हमार गौंक सभापति ज्यू कूनी कि पैली बटी सड़क में मलु ऐ गयौ तो मलु हटाण में भौत दिन लागि जांछी। जब बटी बुडलोजर चलीं सड़कौ मलु जल्दी साफ है जाणौ। सभापति ज्यू कूनी कि आपदा में सड़क ठीक करणा लिजी न तो क्वे टेंडर हूंछ न क्वे परमिशन। ठेकदार और सैप लोग खूब मनमानी करनी। सभापति ज्यू कूनी कि य मलू न हलु हूछ। जब ठेकदार और सैप लोगूं कैं खूब डबल कमाणौ मौक मिलि जां।
उत्तराखंड में लै मानसून वालि बारिश चलि रै। जरा लै द्यो है गयो तो डी एम सैप स्कूलै छुट्टी करि दिणीं। जाग जगां पाणि सीर फुटि गे। हमार गौंक सभापति ज्यू कुणी कि पैली बटी सतझड़ हुंछी। लगातार सात दिन द्यो हुंछी। सारै जमीन तर है जांछी। वी बाद जाग जगां पाणि सीर फुटछि। नान-तिन जाग जगां खेल-खेल में पाणि धार बणाछी। पाणि नहर निकाउछी। रामबांसा पतेल लिबे घटौ फितौड़ बनाछी। यानी नान-तिन पनचक्की यानी बिजुलि बनाणौ खेल करछी। गौं घरौं पना नान तिन चौमास में जाग- जगां गध्यरां में खाउ यानी नान-नान तालाब बनाछी। इतवारा दिन सारै गौं नान ग्वाउ जैबे अलग-अलग खाउ बनाछी। बाद में उ खाउ में धुपरि कै देर तक ऩगड़ै नांछी। जो जगां ठुल खाउ हुछी। उ खाउ में बौं लै काटछी। यूं खावोें में द्वि-चार महैंण तक पाणि रूकनै छी। आब न तो पैली जसै चैमास हूंछ न तो पैली जसै नान। आब- अबै बादल फुटण रयीं। इक्के जाग पाणि कुथव यानी बोरि भरि बे टटकै दिणी यसै लागण रौ। पाणी सिर कमै जाग फुटण रै। पाणी सीर फुटि लै गयीं तो नना पास पाणि और ढूंग माटौ खेल करणौ बखत नहां।
उत्तराखंड में पैली बटी खेति पाति दगाड़ पशुपालन लै एक रूजगार हूछी। लगभग सबूं घर में गोरू,बाछ,भैंस हूंछी। इतवारा दिन सारै गौं नान तिन ग्वाउ जांछी। ग्वाउ जैबे चौमास में पाणिक खेल करछी। ग्वाउ जैबे आपुण लिजी नना-नान कुड़ यानी छप्पर बणाछी। खेल-खेल में भ्यो काटि बे सड़क बनाछी। ढूंग पाथरा गाड़ि या कार बणै बे खेल करछी। खेल करनै कै दिनै गोरू बाछ उज्याड़ न्है जांछी। फिर घर बटी डांठ खाछी यानी घर वाल नना कैं खूब गाई ठोकछी। क्वे-क्वे नान तो हाथल चुनि बे बोरि में भरि बे घा घर हूं लै लिजांछी। इतवारा दिन ग्वाउ में पू या पकौड़ि लै पाकछी। क्वे आपुण घर बटी तेल चोरि बे ल्यूंछी। क्वे पिसूं(आट) तो क्वे मस्याल,चीनि और गुड़ चोरि बे ल्यूंछी। थ्वाड़-थ्वाड पिसूं सब आपुण घर बटी चोरि बे लिजांछी। फिर धौ कै पू या पकौड़ि खांछी। नना में इतू एकता हूंछी। ग्वावै बात ग्वाउ तक रूंछी। घर वालूं कैं क्ये पत्त तक नि लागछी। आबा नान तो चट्ट कै रील बणै बे सोशल मीडिया में डालि दिणीं।
पहाड़ पन खेति पाति और गोरू बाछ पालण लोगूंल कम करि हालौ। आब गोरू ग्वाउ लै कमै नान जानी। नान ग्वाउ गया लै तो मोबाइल पर ज्येड़ी रूनी। सबूंल आपुण नना कैं टच वाल फोन दिरौं। नान तिन ग्वाउ पन लै मुबाइल परै ब्योमी रूनी।
उत्तराखंड में जाग-जगां सौणा महैण लोग पुज पाठ में लागि रयीं। गौनू पन जाग-जगां बैसि चलि रयीं। क्वे भागवत करण रयीं तो क्वे जगां शिव पुराण चलि रौ। जौ जागर लै चलियै छन। गध्यार-मध्यरां में स्यैणी और नना कैं झप्याट यानी छल छित्तर लागणै रौ। ब्याल बखत लोग द्यप्ता डंगरी हूं बभूत लगानै छन। बभूत लगाण बखत यदि खूब जम्हाई ऐंछ तो बतौनी कि ठुल भूत छू। रौखाई करि बे, चौबाट में खिचड़ि धरि बे जादेत्तर छल छित्तर न्है जां। जै छल -छित्तर नि जान तो उ लोग नजिका गौंक पुछ्यारा पास जानी। पुछ्यार बकार,मुर्गी,बोतल और पुजौ समानौ लिस्ट द्यूछ। वी बाद कुछ लोग तो बकार मुर्गी दिबे टटकन है जानी। जो विश्वास कम करनी उ एक है जादे बखत छल-छित्तर पुजनी। घरौं पन एक किस्स छू सैम पुजि जां भैम नि पुजिन। जो लोग जादे भैम करनी। पुछ्यार उनूकै आपुण जजमान बणै ल्यूं। घरौं पन कुछ पुछ्यारांकि रोजि रोटि तो भैम पुजणा चक्कर में चलि रै। घरौं पन हरी-परी साग खवै चलि रै। गदुवौ साग में मलाई वाल दै जै डालि दियो तो साग में रंगत ऐ जाणै। चौमास में आंग चसकन-बिसकन है जाणौ। आदै चहा लोग पीणै रयीं। सरकारल जाग जगां अस्पताल खोलि रयीं। मैसों अस्पताल दगड़ै जानवरों अस्पताल लै सरकारल खोलि रयीं। लोग जानवरों अस्पताल जाणा बजाय बल्दा पुठ पर डबल छुवै बे पुछ्यरा पास जाणै रयीं।
आज इतूकै लेखण रयूं। चिट्ठी ठुलि हैगे कै नराज झन हया। रोज सोचनू कि कम लेखूल। पर मनसुप जसै लागि जानी। चिट्ठी मिलि गे कै एक आंखर लेखि दीया। आज भोउ सबूं मुबाइल पर अनलिमिटेड प्लान हूंछ। एक आंखर लेखि दिला। तुमर मुबाइल घोइण जै क्ये रौ। चिट्ठी पढ़ि बे भल लागलौ तो इष्ट मितुरौं कै लै शेयर करि दीया। पहाड़ पन आपुण इज-बौज्यू और आम-बुब कै इकलै झन छोड़िया। गौं बाखई पन लोग बहुत मजाक बनानी। मरि बे पिपो पाणि और सराद में पंडि ज्यू कैं दान करि दिया। भलि बात छू। पर ज्यौन जी बुड़-बाड़ी कैं एक घुटुक चहा बखत पर मिलि जाओ, य जुगुति करि दिया। आज भोवा ब्वारी सास सौरन कैं जादे मुख नि लगाण राय। शिबौ बुड़-बाड़ि परेशान छन। भोल हमरि लै यसै गत्त होलि य समझि बे बुड़-बाड़ी स्याउ करि दिया। मौसम बदलण रौ। आपण ज्यानै हिफाजत करीया तबै पालना होलि। बांकि फिर लेखूल
तुमर मितुर,
उदय किरौला
संपादक बालप्रहरी
सचिव बालसाहित्य संस्थान