12वीं के बाद खेलों में करियर – अवसरों की नई दुनिया
वासू पांडे
भारत में लंबे समय तक खेलों को केवल मनोरंजन और शारीरिक गतिविधि का माध्यम माना जाता रहा, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यह सोच तेजी से बदली है। आज खेल न केवल देश का गौरव बढ़ाने का माध्यम हैं, बल्कि युवाओं के लिए एक सफल, सम्मानजनक और आर्थिक रूप से मजबूत करियर विकल्प भी बन चुके हैं। ओलंपिक, एशियाई खेल, राष्ट्रमंडल खेल, आईपीएल, प्रो कबड्डी लीग, इंडियन सुपर लीग और बैडमिंटन लीग जैसी प्रतियोगिताओं ने खेलों को नई पहचान दी है। इसके परिणामस्वरूप खेल उद्योग में रोजगार के अवसर भी लगातार बढ़ रहे हैं।
12वीं कक्षा के बाद अधिकांश छात्र डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षक या प्रशासनिक सेवाओं जैसे पारंपरिक करियर विकल्पों की ओर बढ़ते हैं। लेकिन जिन छात्रों की रुचि खेलों में है, उनके लिए आज अनेक ऐसे अवसर उपलब्ध हैं जिनके माध्यम से वे अपने जुनून को ही अपना पेशा बना सकते हैं। आवश्यकता केवल सही जानकारी, उचित प्रशिक्षण और दृढ़ संकल्प की है।
खिलाड़ी के रूप में करियर
खेलों में करियर की बात आते ही सबसे पहले खिलाड़ी बनने का विचार आता है। क्रिकेट, बैडमिंटन, हॉकी, फुटबॉल, एथलेटिक्स, कबड्डी, बॉक्सिंग, शूटिंग, तीरंदाजी, कुश्ती और टेनिस जैसे खेलों में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करके खिलाड़ी सम्मान और आर्थिक सफलता दोनों प्राप्त कर सकते हैं।
आज भारत के कई खिलाड़ी करोड़ों युवाओं के लिए प्रेरणा बने हुए हैं। उनकी सफलता यह साबित करती है कि यदि प्रतिभा और मेहनत का सही संयोजन हो, तो खेलों के माध्यम से भी विश्व स्तर पर पहचान बनाई जा सकती है।
खेल केवल खिलाड़ी बनने तक सीमित नहीं
बहुत से विद्यार्थियों की यह धारणा होती है कि खेलों में करियर का अर्थ केवल खिलाड़ी बनना है। वास्तव में खेल उद्योग में सैकड़ों प्रकार के रोजगार उपलब्ध हैं। यदि कोई छात्र राष्ट्रीय स्तर का खिलाड़ी नहीं बन पाता, तब भी उसके लिए खेल क्षेत्र में अनेक संभावनाएं मौजूद रहती हैं।
उदाहरण के लिए—
स्पोर्ट्स कोच
फिटनेस ट्रेनर
स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग कोच
स्पोर्ट्स मैनेजर
स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट
स्पोर्ट्स न्यूट्रिशनिस्ट
फिजियोथेरेपिस्ट
स्पोर्ट्स साइकोलॉजिस्ट
स्पोर्ट्स एनालिस्ट
रेफरी और अंपायर
इवेंट मैनेजर
इन सभी क्षेत्रों में प्रशिक्षित युवाओं की मांग लगातार बढ़ रही है।
12वीं के बाद कौन-कौन से कोर्स उपलब्ध हैं?
खेल क्षेत्र में करियर बनाने के लिए कई शैक्षणिक पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं। इनमें प्रमुख हैं—
B.P.Ed. (Bachelor of Physical Education)
B.Sc. Sports Science
Bachelor in Sports Management
Bachelor of Physiotherapy (BPT)
Diploma in Sports Coaching
Diploma in Fitness Training
Diploma in Sports Management
B.Sc. Exercise Science
इन कोर्सों के माध्यम से विद्यार्थी खेलों के वैज्ञानिक, तकनीकी और प्रबंधन संबंधी पहलुओं को समझते हैं और रोजगार के लिए तैयार होते हैं।
प्रमुख सरकारी संस्थान
भारत सरकार और विभिन्न राज्यों द्वारा कई प्रतिष्ठित संस्थान संचालित किए जा रहे हैं जो खेल शिक्षा और प्रशिक्षण प्रदान करते हैं।
प्रमुख संस्थानों में शामिल हैं—
Sports Authority of India (SAI)
Netaji Subhas National Institute of Sports (NSNIS), पटियाला
Lakshmibai National Institute of Physical Education (LNIPE), ग्वालियर
SAI National Centres of Excellence
Khelo India Training Centres
इन संस्थानों में प्रवेश प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को उच्च गुणवत्ता का प्रशिक्षण, आधुनिक सुविधाएं और अनुभवी प्रशिक्षकों का मार्गदर्शन मिलता है।
सरकारी नौकरियों में अवसर
खिलाड़ियों और खेल शिक्षा प्राप्त युवाओं के लिए सरकारी क्षेत्र में भी अनेक अवसर उपलब्ध हैं।
निम्न विभाग नियमित रूप से खिलाड़ियों की भर्ती करते हैं—
भारतीय रेलवे
भारतीय सेना
भारतीय वायु सेना
भारतीय नौसेना
केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF)
सीमा सुरक्षा बल (BSF)
केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF)
राज्य पुलिस विभाग
सरकारी विद्यालय एवं विश्वविद्यालय
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को कई राज्यों में सीधी नियुक्ति और विशेष प्रोत्साहन भी प्रदान किए जाते हैं।
खेलो इंडिया योजना का महत्व
भारत सरकार द्वारा शुरू की गई खेलो इंडिया योजना ने देश के खेल परिदृश्य को नई दिशा दी है। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों से प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान कर उन्हें प्रशिक्षण, छात्रवृत्ति और प्रतियोगिताओं के अवसर प्रदान करना है।
इस योजना के माध्यम से हजारों युवा खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने में सफल हुए हैं। खेलो इंडिया ने छोटे शहरों और गांवों के खिलाड़ियों को भी अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच दिया है।
खेलों में आय और भविष्य
एक समय था जब खेलों में आर्थिक सुरक्षा को लेकर संदेह रहता था। आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। सफल खिलाड़ी, कोच, फिटनेस ट्रेनर, स्पोर्ट्स मैनेजर और फिजियोथेरेपिस्ट आकर्षक आय अर्जित कर रहे हैं।
एक प्रशिक्षित फिटनेस ट्रेनर प्रतिमाह 30,000 से 1 लाख रुपये तक कमा सकता है। अनुभवी कोच और स्पोर्ट्स मैनेजर इससे भी अधिक आय प्राप्त कर सकते हैं। वहीं राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी पुरस्कार राशि, प्रायोजन (Sponsorship) और विज्ञापनों से लाखों-करोड़ों रुपये अर्जित करते हैं।
निष्कर्ष
भारत में खेलों का भविष्य अत्यंत उज्ज्वल है। सरकार, निजी क्षेत्र और खेल संगठनों के बढ़ते निवेश ने युवाओं के लिए नए अवसरों के द्वार खोले हैं। यदि किसी विद्यार्थी में खेलों के प्रति जुनून, अनुशासन और मेहनत करने की क्षमता है, तो वह इस क्षेत्र में शानदार करियर बना सकता है।
खेल केवल रोजगार का माध्यम नहीं हैं, बल्कि वे आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, टीम भावना और स्वस्थ जीवन शैली का भी विकास करते हैं। इसलिए 12वीं के बाद खेलों में करियर चुनना आज के युवाओं के लिए एक समझदारी भरा और दूरदर्शी निर्णय साबित हो सकता है।
लेखक बैडमिंटन के राष्ट्रीय खिलाड़ी रह चुके हैं । वर्तमान में वह हल्द्वानी नैनीताल में बैडमिंटन खिलाड़ियों को कोचिंग दे रहे हैं।