डा.शमशेर सिंह बिष्ट की आठवीं पुण्यतिथि पर अनियंत्रित विकास से घायल हिमालय पर विस्तृत परिचर्चा आयोजित
अल्मोडा। डा.शमशेर सिंह बिष्ट की आठवीं पुण्यतिथि पर अनियंत्रित विकास से घायल हिमालय पर विस्तृत परिचर्चा आयोजित की गई, कार्यक्रम का संचालन करते हुए दयाकृष्ण काण्डपाल ने कहा कि हिमालय के पर्वतीय भू -भाग में भू राजनैतिक एकता मे शमशेर सिह बिष्ट व साथियों का योगदान अविस्मरणीय है ।बतौर अपना वक्तव्य देते हुए कार्यक्रम के मुख्य वक्ता कुमार कलानन्द मणि ने कहा कि डा. शमशेर सिह बिष्ट को विश्व में चिपको आंदोलन के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण के आन्दोलन को विकसित करने ,मद्यपान जैसी बुराई के खिलाफ लड़ने भिड़ने के लिये याद किया जाना चाहिए उन्होने कहा कि जो आक्सीजन मुफ्त मिलती थी अब उसके बैंगलोर में

ऑक्सीजन पार्लर बनने से शुरुवात हो रही है उन्होंने कहा कि आजादी के बाद ग्रामीण भारत के प्रति घृणा फैलाने की नीति पर चल पड़ा यूरोप को विकास का माडल समझा गया परिणाम यह है कि विश्व के कई शहर आज रहने लायक नही रह गये है भारत के कई विकसित शहरों में सास लेने के लायक नही है ।बोतल बन्द पानी नैनो प्लास्टिक का श्रोत है। आज हवा पानी, अब अनाज भी शुद्ध नही है । गांधी ने 1909 में हिन्द स्वराज पुस्तक लिखते हुए हमें चेतावनी दी कि आधुनिकता विनाश का प्रतीक है कोई भी वस्तु शुद्ध व साफ नही है ।गोवा में एयर प्रदूषण के लिये एयर फिल्टर लग रहे हैं ।अब दस साल के बाद आक्सीजन फिल्टर हर किसी की जरुरत बन जायेगी दुनिया की आबादी को कम करने के लिए कई प्रयास हो रहे है।उन्होंने कहा कि उत्तराखंड बना पर इसका लाभ किसे मिला अनियंत्रित पर्यटन ने उत्तराखंड के पर्यटक शहरों को बर्बाद कर दिया है, पहाड़ों में दिल्ली वालो के बंगले बन रहे ।ग्लोबलाइजेशन के इस दोर मे समस्याएं बढती जा रही हैं। हर देश आबादी को लेकर परेशान है,इस अवसर पर डा. महेन्द्र सिह मिराल ने स्लाईड सो के माध्यम से हिमालय की वर्तमान हालातों पर चर्चा करते हुए कहा कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण वैश्विक तापमान बढ़ जाने से हिमालय में बड़ी बड़ी झीले व भू गर्भीय हलचल से हिमालय में झीलो का बनना व बिगड़ना चलता ही रहता है किन्तु नदी घाटियों में जो नगर बसाये जा रहे है वह भविष्य के खतरो का संकेत है । अजयमित्र सिंह बिष्ट ने मुख्य वक्ताओं का जीवन परिचय दिया । पी सी तिवारी ने सवाल उठाते हुए कहा कि शमशेर सिह बिष्ट के साथ काम करते हुए उन्होंने सीखा कि सवालों का समाधान करने के लिये व लड़ना बोलना जरूरी है हिमालय की इन समस्याओं के सरकारों की जवाबदेही तय होनी चाहिए ।
डा.निर्मल जोशी ने नैनीताल के भू -धसाव पर चिन्ता व्यक्त की ।एड.जगत रौतेला ने उत्तराखंड के जन संघर्षों पर शमशेर बिष्ट की भूमिका को याद किया ।पूर्व पालिकाध्यक्ष प्रकाश चन्द्र जोशी ने शमशेर सिह बिष्ट को याद करते हुए कहा कि वह पहाड की जनसमस्याओं के लिये हमेशा लड़ते भिड़ते रहे। अजयमित्र सिंह बिष्ट ,बिशन दत्त जोशी, जंगबहादुर थापा, डा.वसुधा पन्त ने गांधी शान्ति प्रतिष्ठान दिल्ली के रमेश शर्मा, कुमार कलानंद मणि व डा.महेन्द्र सिंह मिराल का साल उड़ाकर सम्मान किया। कार्यक्रम का शुभारंभ जन गीतों से हुआ। रेवती बिष्ट ने सभी आगंतुकों के लिए धन्यवाद संबोधन दिया । कार्यक्रम में ब्रह्मानंद डालाकोटी , डॉ. जे सी दुर्गापाल,डॉ.निर्मल जोशी,आनंद सिंह बगड़वाल,मोहम्मद हारिस , शिवदत्त पाण्डे,राम सिंह,बसंत खनी, डॉ.हयात रावत, डॉ. देव सिंह पोखरिया,महेश परिहार,शेखर लखचौरा,कवीन्द्र पंत ,भावना जोशी,विनय किरौला,आशीष जोशी,संजय पांडे आदि अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे ।