सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय और मिशन पुराण फाउंडेशन, दिल्ली के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए
सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय, अल्मोड़ा और मिशन पुराण फाउंडेशन, नई दिल्ली के बीच एमओयू हस्ताक्षर हुए। यह समझौता ज्ञापन (MoU) प्राचीन ग्रंथों पर आधारित गंगा से संबंधित शोध, ग्रंथों से पुष्टि (validation), साहित्य समीक्षा, डेटा संकलन, विश्लेषण और सभी संबंधित शैक्षणिक सहायता में समन्वय स्थापित करेगा। प्राचीन ग्रंथों के अनुसार माँ गंगा की प्राचीन धाराओं की पहचान और दस्तावेज़ीकरण, परियोजना के दौरान भू-विज्ञान (Geology), जल-विज्ञान (Hydrology) और वाटरशेड मैनेजमेंट पर आधारित अध्ययनों में विशेषज्ञता प्रदान करेगा। प्राचीन श्लोकों और भौगोलिक पहचान की पुष्टि विश्वविद्यालय द्वारा की जाएगी; साथ ही, परियोजना के मिशन से संबंधित अन्य राष्ट्रीय, सरकारी और अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालयों/प्राधिकरणों/संस्थानों के साथ संवाद स्थापित किया जाएगा।
मिशन पुराण फाउंडेशन के साथ मिलकर प्राचीन श्लोकों की पहचान, ग्रंथों का अन्वेषण और अभियान (expedition) की योजना बनाई जाएगी। भौगोलिक स्थानों पर हिमालयी मैदानी अभियानों सहित फोटो और ऑडियो-विजुअल प्रलेखन में विशेषज्ञता का उपयोग, विशेषज्ञों के साथ आगे के विश्लेषण के लिए सभी शोध और डेटा के स्थान, पहचान और स्रोत का पता लगाने के लिए सभी शोध/संबंधित अभियानों का नेतृत्व करेंगे। इसके साथ ही गंगा के सांस्कृतिक, आध्यात्मिक, ऐतिहासिक, पर्यावरणीय, आर्थिक और पारिस्थितिक महत्व से संबंधित प्रलेखन और अनुसंधान किया जाएगा।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो सतपाल सिंह बिष्ट ने बताया कि इस एमओयू के होने से गंगा और उसके किनारों पर बसे समुदायों के बारे में जागरूकता, शिक्षा और संरक्षण गतिविधियों के साथ-साथ परियोजना के उद्देश्यों की दिशा में संयुक्त रूप से काम करेंगे। पुराणों में वर्णित गंगा नदी का निर्माण करने वाली प्राचीन धाराओं और नदियों की पहचान की जाएगी और भविष्य के लिए व्यावहारिक कार्य योजनाओं के साथ वर्तमान स्थिति की रिपोर्ट तैयार की जा सकेगी।
मिशन पुराण फाउंडेशन के नितिन शर्मा ने कहा कि प्राचीन संस्कृति और आध्यात्मिक महत्व के स्थानों की पहचान की जाएगी, गंगा के मार्ग में पड़ने वाले गांवों, स्थानों, कस्बों और शहरों के पौराणिक महत्व की पहचान कर उसे पुनः स्थापित किया जाएगा।
इसके साथ ही इस एमओयू के होने से गंगा के दुर्गम पर्वतीय भूभाग के साथ-साथ चिन्हित दिव्य धारा में विशेष और गहन कार्य करना, प्राचीन विरासत को समझना, सूचनाओं को समझना और नए चिन्हित क्षेत्र में किए जाने वाले कार्य के दायरे की पूर्व-योजना बनाना, प्राचीन ग्रंथों से प्राप्त गंगा नदी के बारे में अंतर्दृष्टि और ज्ञान की जांच करना, इसके सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व और भारत में इसकी ऐतिहासिक भूमिका को उजागर करना, यह जानकारी राष्ट्र और विश्व भर के लोगों को प्रबुद्ध और सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
इस समझौता ज्ञापन में विश्वविद्यालय की ओर से कुलपति प्रो सतपाल सिंह बिष्ट और मिशन पुराण फाउंडेशन, दिल्ली की ओर से नितिन शर्मा ने हस्ताक्षर किए। इस एमओयू के गवाह रूप में डॉ. ललित चन्द्र जोशी और श्री बिपिन चन्द्र जोशी ने हस्ताक्षर किए।