उत्तराखंड के मित्रों के नाम चिट्ठी
शुभ स्थान - किरोलि, द्वरहाट
सौंण 22 पैट, वृहस्पतिवार
6 अगस्त,2026
सिद्धीश्री सर्वोपमा योग्यवर-6
आमा-बुबू, ठुल ईजा-ठुल बौज्यू, कका-काकी,ममा-मामी और सबै ठुला कैं म्येरि पैला और ननां कैं प्यार आशीष।
उत्तराखंड में आज भोउ नेता लोग जनता जनार्दनै समस्या देखण-सुणण रयीं। क्वे नेता क्ये स्कीम मंजूर करै बे ल्याण रौ तो दुसौर नेता उ है पैली सोशल मीडिया पर शेयर करि दिणौ कि उ स्कीम वील मंजूर करै रै। क्ये न क्ये बहानल नेता लोग गौं इलाक में दौर करण रयीं। अमुमन जून जुलाई में सरकारि औफिस में सैप और कर्मचारियों बदई औडर ऐजां। चुनाव नजिक छन य वजैल अलबेर देर तक बदलि हुण रै।
उत्तराखंड में सौणा महैण शिवार्चन, बैसि, जौ जागर और भजन कीर्तन जाग-जगां चलियै छन। य वजैल क्याउ और दुसार-तिसार फल बहुत महंग है गयीं। पहाड़ि आम बजार पन बिचाण गयीं। घरौं पन आम, अमरूद, नाशपति, तुमड़ि नाशपति, आड़ु डाउ लुटि रयी। गड़मिहो यानी नाशपति और दुसार-तिसार फलौं कुगत हैरै। 5-10 रूपै में एक कट्ट ठेकदार लिजाण रयीं। जो बिचार डाई-बोट लगै बे उद्यम करण रयीं। उनूंकै फलौ ठीक भौ नि मिलण रौय। ठेकदार लोग माथ-मथै पचकै जाणी। घरौं पन पिनाउ गाब और गदुवा टुक मिलै बे लोग साग बनाण रयीं। क्वे-क्वे लोग पिनाउ गाबां पत्यूड़ बणै बे लै खाण रयीं। हरी-परी साग आज भोउ सब नि खाण राय। चौमास में हरी-परी साग में गनेल लागि जानी। य वजैल सब लोग बौड्यै(लाही) , और मुवां पात कम खाण रयीं। घरौं पना लोग पोदिन टोड़ि बे बजार पन लै बेचण रयीं। घरौं पन नाश्ता में आज भोउ नान तिन मैगी बनाण रयीं।
जो गौनू में बैसि चलि रयीं। वेति आज 22 पैट हूं भनार चलि रौ। बैसी भनार में नजिका गौनू में लै न्यौत पड़नै छू। गौं पन जब भंडारा हूंछ। जादेत्तर लोग इक्कै साग बनानी। आलू, लौकी साग में आड़,नाश्पति और खट्ट स्यो जै डालि दियो तो साग में नई स्वाद ऐ जां। य स्वाद मंदिरों कैं प्रसाद में हूंछ। आज भोउ देखा-देखी भंडारा में लोग पनीर और दुसार साग लै बनाण गयीं। मंदिरों में त्यार-ब्यार हूं आजि लै लोग गुइयां-गुंई यानी मीठ पू बनानी। मंदिरों में पुवै कै भोग लागूं। देवि मंदिर, हरज्यू और कएक मंदिरों में हलुवौ भोग लागूं। हनुमान ज्यू और कुछ द्यपतां कैं दूध में ओली पिसुवौ बणी रोट चड़ाई जानी। पैली बटी मंदिरों में 5-6 तौल हलु घोटी जांछी। आब मंदिर में तो पिसुवौ भोग लगाण रयीं। बांकि लोगूं लिजी सूजि बनण रै। पैली बटी हलुवा ठुल-ठुल ढिन बणै बे बांटछी। आब हलु लोग कमै खाणी। ब्या काज में हलुवा जाग में दस्तूर सूजि बनण रै। क्वे-क्वे मंदिरों में 22 दिनै बैसि बाद बकरां मुनई छनकै बै बलिदान यानी मारकाट हुणै। य रिवाज भल नहां। 22 दिनै तपस्या बाद द्यपतां नाम पर बकरां मुनई छनकाण भल रिवाज नहां। पुज बाद बकरै मुनई, सापड़ि और गणुवां लिजी झगौड़ है जाणौ।
पहाड़ पन चौमास में जाग-जगां कच्यार है जाणौ। जादेत्तर घरौं में सीलन है जाणै । सीलन में आंग-चसकन बिसकन है जाणौ। बुड़-बाड़ि कैं आज भोउ जर-बुखार लै ऐ जाणौ। क्वे जादे आम भसकै दिणी। उनार बदन में गुदाण उलई जाणी। जो घरौं पन उपन सन्योसू छन उनेरि रातै नीन हराण हैरै। उसि घरौं पन सन्योसू तो कमै है गयीं। पर उपन तो निगुर जलन करि दिणी। सारै बदन खजान है जाणौ। चौमास में स्कूली नान लै भिजि जाणी। द्यो है गयो तो स्कूल में छुट्टी है जाणै। बागस्यर में रोज-रोज छुट्टी करण पर अभिभावक नराज है जाणीं। क्वे कूणी कि आब जून में पहाड़ा स्कूल खोलणौ औडर करि दियो। चौमास में एक महैण छुट्टी करि दियो। स्कूला मासपै आपुण परमोशन और बदई चक्कर में लागि रयीं। माल बाखई शिबू फौज बटी रिटैर हैगो। रिटैर हयी बाद घरौं पन घुटुक-घाटुक वालि पार्टी वील करै छू। वी स्यैणिल लै आपुण दिराणि-जिठांणी कैं चुपचाप पार्टी करै बल। पारै बाखई पिरमु हौलदार तो हर महैण केंटीन बटी बरंडी ल्यै बे बेचनै छू। चौमास में बरंडी पी बे आंग चसकन-बिसकन कम हूंछ बताण रयीं। य वजैल आज भोउ पिरमु हौलदारै खूब चलि रै। घरौं पन आज भोउ घ्वाग यानी काकुनि खूब है रयीं। बानर खेत बटी घ्वाग चहोलि बे खै जाणीं। क्वे-क्वे लोग काकुनि बजार पन बेचि बे जाणी। क्वे चुल पन क्वैल में भुनि बे घ्वाघ खाण रयी,क्वे गैस में सेकि बे खाण रयीं। क्वे कुकर में उमाई बे खाण रयीं। खिमदा ब्वारि आपुण सास-सौरा लिजी घ्वाघ भुनि बे सील में पिसि बे दिण रै। जनार दांत नहां उ बुड़-बाड़ि लै घ्वाग चाखि लीनीं। हरी काकौड़ और हरी लूण आज भोउ बहुत चलि रयीं।
आज इतूकै लेखण रयूं। चिट्ठी ठुलि हैगे कै नराज झन हया। रोज सोचनू कि कम लेखूल। पर मनसुप जसै लागि जानी। चिट्ठी मिलि गे कै एक आंखर लेखि दीया। आज भोउ सबूं मुबाइल पर अनलिमिटेड प्लान हूंछ। एक आंखर लेखि दिला। तुमर मुबाइल घोइण जै क्ये रौ। चिट्ठी पढ़ि बे भल लागलौ तो इष्ट मितुरौं कै लै शेयर करि दीया। पहाड़ पन आपुण इज-बौज्यू और आम-बुब कै इकलै झन छोड़िया। गौं बाखई पन लोग बहुत मजाक बनानी। मरि बे पिपो पाणि और सराद में पंडि ज्यू कैं दान करि दिया। भलि बात छू। पर ज्यौन जी बुड़-बाड़ी कैं एक घुटुक चहा बखत पर मिलि जाओ, य जुगाड़ करि दिया। आज भोवा ब्वारी सास सौरन कैं जादे मुख नि लगाण राय। शिबौ बुड़-बाड़ि परेशान छन। भोल हमरि लै यसै गत्त होलि य समझि बे बुड़-बाड़ी स्याउ करि दिया। मौसम बदलण रौ। आपण ज्यानै हिफाजत करीया तबै पालना होलि। बांकि फिर लेखूल
तुमर मितुर,
उदय किरौला
संपादक बालप्रहरी
सचिव बालसाहित्य संस्थान
दरबारीनगर अल्मोड़ा उत्तराखंड