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अल्मोड़ा साहित्य महोत्सव 2025 – दूसरे दिन की प्रमुख झलकियाँ

दिनेश भट्ट संवाददाता:
अल्मोड़ा साहित्य महोत्सव 2025 के दूसरे दिन की शुरुआत संगीत और संवाद के मनमोहक संगम के साथ हुई। दिन की शुरुआत हुई प्रसिद्ध सरोद वादक स्मित तिवारी के सुरीले सरोद वादन से, जिन्होंने राग जौनपुरी की मनमोहक प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

इसके बाद “*सिनेमा और रंगमंच” विषय पर एक विचारोत्तेजक सत्र आयोजित हुआ, जिसमें **जरहूर आलम, *रूप दुर्गापाल और आशुतोष जोशी शामिल थे तथा संचालन हेमंत बिष्ट ने किया।
रूप दुर्गापाल ने फ़िल्म और मनोरंजन जगत में अपने अनुभवों के साथ-साथ अपने आध्यात्मिक सफर पर भी चर्चा की। ज़रूर आलम ने नैनीताल स्थित अपने नाट्य समूह ‘युग मंच’ के साथ अपने रंगमंचीय सफर की भावनात्मक यात्रा साझा की।

दूसरे दिन का सबसे चर्चित सत्र रहा “मनोहर श्याम जोशी के अनेक संसार”, जो महान लेखक *मनोहर श्याम जोशी की स्मृति को समर्पित था। इस सत्र में *पुरुषोत्तम अग्रवाल, **प्रभात रंजन, और *रंजन जोशी शामिल रहे, जबकि संचालन डॉ. दीपा गुप्ता ने किया।
श्री अग्रवाल ने जोशी जी के प्रसिद्ध उपन्यास ‘कुरु कुरु स्वाहा’ और ‘कसप’ पर चर्चा की, जिनमें से ‘कसप’ को साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। प्रभात रंजन ने जोशी जी के पत्रकारिता जीवन पर प्रकाश डाला—दिनमान और साप्ताहिक हिंदुस्तान जैसी प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में उनके योगदान के साथ-साथ दूरदर्शन पर उनके लोकप्रिय धारावाहिक ‘बुनियाद’ और ‘हम लोग’ का उल्लेख किया। वहीं, रंजन जोशी ने उनके व्यक्तिगत जीवन के मानवीय पहलुओं पर बात करते हुए जोशी जी के स्नेहपूर्ण और संवेदनशील व्यक्तित्व की झलक साझा की।

अगला सत्र था *“प्रकृति, नारी और पर्यावरण”, जिसमें **अदिति शर्मा, *अनुराधा पांडे और डॉ. नैणवाल शामिल रहे तथा संचालन डॉ. वसुधा पंत ने किया। इस चर्चा में वक्ताओं ने बताया कि परंपरागत रूप से नारी और पर्यावरण के बीच गहरा संबंध रहा है, किंतु आज के समय में यह आवश्यक है कि महिलाओं को केवल ‘पालनहार’ या ‘संरक्षक’ की भूमिका में सीमित न देखा जाए, क्योंकि बदलते समय के साथ महिलाओं की आकांक्षाएँ भी बदल रही हैं।

इसी बीच महोत्सव में बच्चों के लिए आयोजित *“मिनी लिट फेस्ट”, जिसका नेतृत्व *वंषिका वोहरा ने किया, रचनात्मकता और उत्साह से भरपूर रहा। बच्चों के खंड के दूसरे दिन स्टोरी राइटिंग वर्कशॉप का दूसरा सत्र आयोजित किया गया, जहाँ मार्गदर्शक वनीता और वंषिका ने बच्चों को कथानक निर्माण, पात्र विकास और कहानी कहने की कला सिखाई।

अल्मोड़ा साहित्य महोत्सव 2025 का दूसरा दिन संगीत, साहित्य, संवाद और सृजनशीलता की अद्भुत अभिव्यक्ति के रूप में यादगार रहा, जिसने शब्दों, विचारों और संवेदनाओं के उत्सव को नई ऊँचाइ

यों तक पहुँचाया।

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