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अल्मोड़ा का एतिहासिक मल्ला महल ***

कभी चन्द राजाओं की सत्ता संचालन का केन्द्र रहा यह स्थल चन्द शासन की कमजोरियों के कारण गोरखा शासन के अधीन आ गया और तत्कालीन कुमाऊ साम्राज्य पर भी गोरखाओं का अधिकार हो गया। गोरखाओं के पतन के बाद कुमाऊँ-मंडल में भी ब्रिटिश हुकूमत आ गई। ब्रिटिश हुकूमत के प्रशासकों ने इसी स्थान से कुमाऊँ-मंडल का प्रशासन चलाया और अपने साम्राज्य की नीति-रीति तथा कानूनों से कुमाऊँ की जनता पर शासन किया।


तत्कालीन मुख्य प्रशासनिक भवन की छत के नीचे लगा एतिहासिक पत्थर आज भी उस तिथि की याद दिलाता है। अल्मोड़ा की प्रसिद्ध माँ नन्दा देवी पहले इसी स्थल में बने मन्दिर में प्रतिष्ठित थी बाद में वर्तमान स्थान में प्रतिष्ठा कर पुनर्स्थापित की गई। आज भी इस किले/मल्ला महल में बने मन्दिरों में से एक राम शिला मन्दिर में रामनवमी के दिन स्थानीय दर्शनार्थियों की अपार भीड़ रहती है। पहले कुमाऊँ कमिश्नरी का कार्य संचालन अल्मोड़ा से ही होता था, बाद में नैनीताल जनपद का गठन हुआ और कमिश्नरी भी नैनीताल चली गई। जब पिथौरागढ़ जनपद बनाया गया तब अल्मोड़ा जनपद छोटा हो गया। बागेश्वर जनपद बनने के बाद यह जनपद और छोटा हो गया। हाल में ही एक प्रयास और सामने आया लेकिन वह प्रयास न ही टिक पाया और न ही सफल हो पाया।


लगभग दो सौ वर्ष तक जिला प्रशासन का कार्य इसी स्थान से चला। जिलाधिकारी कार्यालय सहित अनेक कार्यालय, न्यायालय, बार एशोसियेशन इस स्थान पर रहे। आज इस स्थान का परिवर्तित स्वरूप संलग्न विडिओ से दिख जाता है। अनेक लोगों की स्मृतियाँ इस स्थल से जुड़ी हैं। वर्तमान में कुछ कार्यक्रम मुख्य भवन के सामने खुले स्थान में कभी-कभार किए जाते हैं। शेष दिनों में यह स्थल एसा ही रहता है जैसा विडिओ में दिख रहा है। अभी पुनर्निर्माण सम्बन्धित कुछ कार्य बचा हो सकता है अधिकांश कार्य सम्पन्न हो गया है। कमरे सब खाली हैं। सम्पत्ती की देखरेख के लिए प्रति शिफ्ट प्रति दिन के हिसाब से एक व्यक्ति नियुक्त है। साफ-सफाई और पुष्प बाटिका बनाने तथा बनाए रखने की वर्तमान में व्यवस्था नहीं दिखी। करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद स्थान को साफ ,स्वच्छ और सुन्दर बनाए रखना भी आवश्यक होना चाहिए। मेरी भी इस स्थान से अनेक स्मृतियां जुड़ी हैं। कल अचानक बाजार से गुजर रहा था तो कदम इधर को भी बढ़ गए और यह पोस्ट सामने है।
विवरण लम्बा होता जा रहा है। अत: विराम देना उचित होगा। शेष फिर कभी, सादर।

प्रकाश पंत
वरिष्ठ पत्रकार

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