अल्मोड़ा
डायरी में लिखा एक शब्द बना उम्मीद की किरण, “राजेपुर” से खुला घर तक पहुंचने का रास्ता,एक दशक बाद अपनों से मिला श्याम…
मानसिक रूप से अस्वस्थ एक व्यक्ति,जो लगभग 10 वर्ष से ताड़ीखेत व मजखाली क्षेत्र में इधर-उधर भटकते हुए जीवन व्यतीत कर रहा था। स्थानीय लोग उसे जानते थे परन्तु वास्तविक
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