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दून पुस्तकालय में अनूप साह व एस.एस. रसायली का नगालैण्ड के परिदृश्य पर स्लाइड शो व व्याख्यान

देहरादून, 26 मार्च, 2026। दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र की ओर से आज सायं केन्द्र के सभागार में एक बेहतरीन स्लाइड शो का कार्यक्रम आयोजित किया गया. इसमें पद्मश्री से सम्मानित, प्रसिद्ध हिमालयी और वन्यजीव छायाकार अनूप साह,तथा एस. एस. रसाइली, आईएफएस, अतिरिक्त प्रमुख मुख्य वन संरक्षक (सेवानिवृत्त) द्वारा नागालैंड की ओर : दीवार पर लगे दर्पण तक की हमारी यात्रा के वृत्तांत शीर्षक से एक स्लाइड शो और व्याख्यान प्रस्तुत किया गया.

इसी विषय पर आधारित एक छाया चित्रों की प्रदर्शनी भी एक दिन पूर्व प्रारम्भ हो गयी है. यह प्रदर्शनी केन्द्र के तीसरे तल पर पांच दिनों तक आम लोगों के दर्शनार्थ प्रातः 11:00 – सायं 4:30 बजे तक निशुल्क खुली रहेगी । जिसमें नागालैण्ड के लोगों समाज व संस्कृति के विविध आयामों को दर्शाने का शानदार प्रयास किया गया है।

व्याख्यान में बोलते हुए अनूप साह व रसाइली ने कहा कि नागालैण्ड में अपनी विशेष समृद्ध और अनूठी सांस्कृतिक विरासत है. दर्शकों के साथ इस राज्य की यात्रा को हम दृश्य चित्रों व प्राप्त अनुभवों की खुशी और आनंद को साझा कर वार्ता के जरिये यह जानकारी आप लोगों तक पहुंचा रहे हैं। इसके पीछे मुख्य उद्देश्य यह है कि इस राज्य की संस्कृति और समाज से लोग परिचित हो सकें।

इस दौरान लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष मेजर जनरल आनंद सिंह रावत (सेवानिवृत्त) ने भी सम्बोधित किया और कहा कि इस तरह की प्रदर्शनी से एक दूसरे क्षेत्र के समाज, लोगों उनकी बोली भाषा, रहन सहन,खानपान व संस्कृति की जानकारी प्राप्त होती है.

उन्होंने नागालैंड में ग्रेट इंडियन हॉर्नबिल के महत्व पर भी प्रकाश डाला. उन्होंने बताया कि ग्रेट इंडियन हॉर्नबिल का नागालैंड में बहुत अधिक सांस्कृतिक महत्व है । जहाँ इसे नागालैंड के राष्ट्रीय पक्षी रूप में महत्व दिया जाता है। यह शक्ति, एकता और नागा पहचान का प्रतीक है, और यह गहराई से जुड़ा हुआ हैऔर नागा लोककथाओं, परंपराओं और मान्यताओं में गहराई से समाया हुआ है

नागालैंड में ग्रेट इंडियन हॉर्नबिल के संरक्षण के लिए जो कदम उठाए जा रहे हैं उसपर भी जानकारी दी गई.। बताया गया कि हॉर्नबिल महोत्सव मनाने का विचार मूल रूप से नागालैंड की सौंदर्य एवं आडंबर सोसायटी (BASN) द्वारा शीतकालीन कार्निवल के रूप में प्रस्तावित किया गया था। बाद में इस अवधारणा को नागालैंड सरकार ने अपनाया और दिसंबर 2000 में इसे हॉर्नबिल महोत्सव के रूप में पुनः आरंभ किया।

इस महोत्सव को मुख्य रूप से अंतर-जनजातीय संबंधों को मजबूत करने और नागालैंड की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के लिए पुनः शुरू किया जाता है। वर्तमान में हॉर्नबिल महोत्सव का आयोजन राज्य पर्यटन विभाग और कला एवं संस्कृति विभाग द्वारा किया जाता है। यह महोत्सव कोहिमा से 12 किलोमीटर दूर किसामा गांव में एक निर्धारित क्षेत्र में आयोजित किया जाता है।

उन्होंने इस बात पर भी जोर देकर कहा कि यहां के समाज को हीन भावना से न देखकर हमें उनकी परिस्थितियों के आधार पर वहां की आजिविका, रहन सहन, खान-पान की जो संस्कृति विकसित हुई उस पर अधिक विचार करने समझने की आवश्यकता समझी जानी चाहिए । व्याख्यान के बाद उपस्थित लोगों ने वक्ता अतिथियों से सवाल -जबाब भी किये.प्रारम्भ में दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र के कार्यक्रम अधिकारी चन्द्रशेखर तिवारी ने लोगों व अतिथियों का स्वागत किया।

इस दौरान संस्कृति सचिव उत्तराखण्ड, जुगल किशोर पंत, धनजंय मोहन, बी.एस. रावत, अशोक महर, पंकज नैथानी, डॉ. डी.के. पाण्डे, हरि चंद निमेष, जगदीश बाबला, ज्ञान रंजन, सोहन सिंह रजवार, अंजलि भरतरी, भूमेश भारती, भारत सिंह रावत, भगवान प्रसाद, घिल्डियाल,डॉ डॉ. लालता प्रसाद, जयप्रकाश खंकरियाल, प्रवीन भट्ट, अर्जुन रावत, अम्मार नकवी, शैलेन्द्र नौटियाल, सुंदर सिंह बिष्ट, पूर्व विनोद सकलानी सहित शहर के कई प्रबुद्ध लोग, साहित्यकार, संस्कृतिकर्मी व युवा पाठक उपस्थित रहे।


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