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अल्मोड़ा की मिठाई सिगौंड़ी……..

अल्मोड़ा की मिठाई में सिगौंड़ी का स्थान प्रमुख है। सिगौंड़ी का नाम सुनते ही मिष्टान्न प्रेमियों के मुँह में पानी आना स्वाभाविक ही है।सिगौंड़ी मूलतः टिहरी गढ़वाल की मिठाई है। अल्मोड़ा के खोये और कारीगरी के मिश्रण से सिगौंड़ी अल्मोड़ा में आकर प्रसिद्ध हुई। रामलाल ठाकुर दास वर्तमान में हीरा सिंह जीवन सिंह जो कि मिष्टान्न विक्रेता थे बद्रीनाथ धाम की यात्रा पर गए।उस समय यात्रा कठिन थी, पैदल ही जाना पड़ता था। वापस लौटते समय थकान और पास में पैसा नहीं होने के कारण उन्होंने गढ़वाल में एक मिठाई की दुकान में काम किया। खुद मिठाई के कारीगर होने के कारण यह मिठाई उनकी समझ में आ गई। उन्होंने अल्मोड़ा आकर इस मिठाई पर प्रयोग किया जो काफी सफल रहा। यह मिठाई अल्मोड़ा की होकर रह गई।

सिगौंड़ी बनाने का तरीका – सिगौंड़ी हरहमेशा ताजा खोये से बनाई जाती है।शुद्ध ताजा पहाड़ी खोये को हल्का भूना जाता है। भूनने से पहले उसमें स्वाद तथा जरूरत के अनुसार चीनी मिलाई जाती है। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि भूनने के बाद भी खोये के रंग में परिवर्तन न हो। खोया जब भुन जाता है तब उसमें खाने वाले केवड़ा के इत्र की एक या दो बूँद मिलाई जाती है और साथ में काला छिलका उतार कर कद्दूकश किया हुआ गोला जरूरत के अनुसार मिलाया जाता है। जब मिश्रण। भलीप्रकार बन जाता है तब उसे मालू के पत्ते से बनाई गई कुप्पी में भलीप्रकार भर दिया जाता है। मालू के पत्ते की सुगंध से सिगौड़ी का स्वाद और भी बढ़ जाता है। यह है सिगौंड़ी का इतिहास और बनाने का तरीका

प्रकाश पंत
वरिष्ठ पत्रकार

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