उत्तराखंड के मित्रों के नाम चिट्ठी
शुभ स्थान - अल्माड़
चैत्र 20 पैट, वृहस्पतिवार
2 अप्रैल, 2026
सिद्धीश्री सर्वोपमा योग्यवर-6
आमा-बुबू, ठुल ईजा-ठुल बौज्यू, कका-काकी,ममा-मामी और सबै ठुला कैं म्येरि पैला और ननां कैं प्यार आशीष।
उत्तराखंड में अघिल साल विधान सभा चुनाव छन। एक पार्टी बटी दुसार पार्टी में भजाभाज शुरू हैगे। चुनाव में आपुण टिकट पक्क करणा चक्कर में नेता लोग लागि रयीं। सब कुर्सी खेल छू। जो पोरबलि तक आपुं कैं कांग्रेस पार्टी ठुल नेता बतौछी। आजकल उ मोदी ज्यू गुणगान करण रयीं। आर.एस.एस. में जंघी पैरि बे पार्टी में आपुण पिछाण बनाणै कोशिश करण रयीं। जो नेता कुछ दिन तक मोदी ज्यू गुणगान करण रछी। आज उ दुसार पार्टी में टिकटा जुगाड़ में लागि रयीं। कांग्रेस में आज भोउ हरदा नाराज चलि रयीं कै सुणाई में ऐरै। हमार गौंक सभापति ज्यू कुण रयीं कि घरौं पन खाण बखत कैका आंग कऊ ऐ जां। जसै लोग सोचण रछी कि ऐला फ्यार वोट सोचि समझि बे द्यूल। नेता लोग एक दूसरै हूं कुणियां निकुणी सब कै दिणी। 31 मार्च हूं बहुतै मास्टर रिटैर है गयीं। स्कूल खालि है गयीं।
पहाड़ा स्कूलों में स्कूली नना दर्ज बदई गो। नान-तिन खुशि है रयीं। नना इज-बौज्यू नना लिजी कौपि-किताब खरीदण हूं बजार जाण रयीं। बजार पन आज भोउ खूब चहल-पहल हैरै। सरकारि स्कूलों में नना कैं किताब सरकार मुफ्त में दीछ। स्कूलों में पुर किताब नि पुजि राय। जादेत्तर मासैप बोर्डा कौपि जांचण हूं जै रयीं। य वजैल स्कूली नना पढ़ाई चाल नि है रयि। कक्षा 8 वाल नान तिन जो 31 मार्च तक स्कूल में भात खाण रछी। 1 तारीख बटी उनौर स्कूलौ भात बंद हैगो। कक्षा 9 वाल नना कैं पोरबलि तक स्कूल में दाउ-भात मिलछी। आब हाफ टाइम में उनूकै भातै टपटपि लै जाणै। प्राइवेट स्कूलों में लै नना पढ़ाई आजि चाल नि है रयि। क्वे-क्वे प्राइवेट स्कूल वालूंल स्कूला एक कमार में कौपि-किताब, बस्त और ड्रैस वालि दुकान खोलि रै। एक मासैप कौपि-किताबौ लिस्ट दिण रयीं। दुसार मास्टर सैप स्कूल में कौपि किताब और ड्रेस बेचण में लागि रयीं।
पहाड़ पन आज भोउ गैस सिलेंडरै कै क्वीड़ चलि रयीं। रतै पर बेरै लैन में लागि बे जनूं कैं बखत पर गैस मिलि जाणै, उ सोचण रयीं कि उनूल जंग जीति हाली। लगभग सबै घरौं में लोग इंडैक्शन वाल चूल लै ल्यै गयीं। क्वे-क्वे होटल वाल और दुकानदार लै लकाड़ खरीदि बे चुल जगाण रयीं। होटल वाल आपुण दुकान पर ‘हमारे यहां चूल्हे की बनी रोटी मिलती है’ कै पोस्टर लगाण रयीं। मार्च में शराब सस्त बिचाण रै कै लोगूल आपुण अघिल महैणौ कोटा लै धरि हालौ। ब्या बर्यात वालूंल लै सस्त में शराब खरीद बे आपुण कोटा पुर करि हालौ।
बिखोती कौतिक नजिक छू। उत्तराखंड में शिवालयों में बिखोती दिन लोग नाण-धूण करनै छन। द्वरहाट में साल्दे बिखोती कौतिकै तैयारी चलि रै। गौं वाल नगार में घ्यू डालि में तताण रयीं। आपुण गौं नगरै घमधमाट जादे होलि कै लोग आपुण नगरै में घ्यू डालि में तैयार करण रयीं। पुराण किस्स कूनी कि दोर्याव आपुण बल्द बेचि बे लै साल्दे-बिखोती कौतिक जरूर जां। य बात आब किस्सै तक रैगे। महंगाई और बेरोजगारी में लोगों रंग में भंग हैगो। देश कोटों बटी लोग आब कौतिक में कम उण रयीं। बैशाख में ब्या काजा लगन छन। य बीच चैता नौर्तन में भूत और छल छितर पुजणा लिजी लोग देश कोटों बटी आपुण गौ गाड़ ऐ रछी। हमार गौंक सभापति ज्यू कूनी जो लोग रात हूं छल छितर या भूत पूजणा लिजी जानी। उ लोग रात हूं पुर बाकौर, कुकुड खै जानी। घुटुक घाटुक लगै बे रात हूं मस्त है जानी। जो लोग भूत पूजणा लिजी जानी। उ लै सब बाघ देखि बे डरन है रयीं।
पहाड़ा नना आंख पर चश्म लागि गो। हमार गौंक सभापति ज्यू कूणी कि मुबाइला वजैल नना आंख फुटि गयीं। पैली बटी लैरू भौ कैं चुप कराणा लिजी इज-बौज्यू नना कैं खेल करांछी। नना कैं सिवाणा लिजी आम और इज लोरी गीत कूंछी। आब सब बदई गो। आज भोउ नान नान डाण घालण रयीं तो सीद मुबाइल नना हाथ पर दिण रयीं तो छ्वाट नान लै चुप है जाणी। लोगूंल द्वि-द्वि मुबाइल धरि रयीं। एक मुबाइल नना हाथ पर दिण रयीं । दुसार मुबाइल पर सब रील देखण में लागि रयीं। आज भोउ रतै पर लोगों के बिस्तर पर चहा दिणौ रिवाज लै कम हैगो। जब तक मुबाइल नि देख झारि फेरण हूं लै लोग नि जाण राय। कवि लोग मुबाइल चालीसा और मुबाइलै आरती लेखि बे खुशि है रयीं। घरौं पन हरी-परी साग चलि रौ। चैता महैण भिटौई दिणै लिजी लोग आपुण च्येलि बेटियां घर जाणै रयीं। कंट्रोल में फ्री राशन मिलणै रौ। हमार गौं कंट्रोल वाल महैणा लास्ट दिन राशन ल्यूंछ। जो लास्ट दिन नि आयौ वी राशन सरकार जब्त करि दिणै य बात कै दिणौ। य बीच मौसम खटमधुर जसै हैरौ। धुपरि कै चड़कैल घाम लागण रौ। रतै ब्याल ठंड हुणै रौ।
आज इतूकै लेखण रयूं। चिट्ठी ठुलि हैगे कै नराज झन हया। रोज सोचनू कि कम लेखूल। पर मनसुप जसै लागि जानी। चिट्ठी मिलि गे कै एक आंखर लेखि दीया। आज भोउ सबूं मुबाइल पर अनलिमिटेड प्लान हूंछ। एक आंखर लेखि दिला। तुमर मुबाइल घोइण जै क्ये रौ। चिट्ठी पढ़ि बे भल लागलौ तो इष्ट मितुरौं कै लै शेयर करि दीया। पहाड़ पन आपुण इज-बौज्यू और आम-बुब कै इकलै झन छोड़िया। गौं बाखई पन लोग बहुत मजाक बनानी। मरि बे पिपो पाणि और सराद में पंडि ज्यू कैं दान करि दिया। भलि बात छू। पर ज्यौन जी बुड़-बाड़ी कैं एक घुटुक चहा बखत पर मिलि जाओ, य जुगाड़ करि दिया। आज भोवा ब्वारी सास सौरन कैं जादे मुख नि लगाण राय। शिबौ बुड़-बाड़ि परेशन छन। भोल हमरि लै यसै गत्त होलि य समझि बे बुड़-बाड़ी स्याउ करि दिया। मौसम बददलण रौ। आपण ज्यानै हिफाजत करीया तबै पालना होलि। बांकि फिर लेखूल
तुमर मितुर,
उदय किरौला
संपादक बालप्रहरी
सचिव बालसाहित्य संस्थान
दरबारीनगर अल्मोड़ा उत्तराखंड
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