21वें राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय प्रमुखों के सम्मेलन का भव्य शुभारंभ
Almora-अल्मोड़ा स्थित मानसखण्ड विज्ञान केंद्र में 13 फरवरी 2026 से 21वें राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय प्रमुखों के सम्मेलन का भव्य शुभारंभ हुआ। यह प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मेलन उत्तराखंड राज्य में पहली बार आयोजित किया जा रहा है, जिसे राज्य के लिए विज्ञान, नवाचार एवं विज्ञान शिक्षा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है।
इस राष्ट्रीय महत्व के सम्मेलन का आयोजन राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय परिषद (एनसीएसएम), कोलकाता के तत्वावधान में उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यू-कॉस्ट) द्वारा मानसखण्ड विज्ञान केन्द्र, अल्मोड़ा किया गया। उद्घाटन समारोह की शुरुआत दीप प्रज्वलन एवं राष्ट्रगीत के साथ हुई। स्वागत भाषण में मानसखण्ड विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक प्रभारी डॉ० नवीन चंद्र जोशी ने बताया कि केंद्र द्वारा विद्यार्थियों, शिक्षकों, सामान्य जन, वन पंचायत सदस्यों एवं शोधार्थियों को विज्ञान, प्रौद्योगिकी और पर्यावरण से जोड़ने हेतु विभिन्न कार्यक्रमों का सफल आयोजन किया गया है।
इस दौरान आगंतुकों की संख्या में निरंतर वृद्धि हुई तथा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों से मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। उन्होंने बताया कि पिछले दो वर्षों में 28,157 तथा वर्तमान वित्तीय वर्ष 2025–26 में अब तक 10,976 आगंतुक केंद्र का भ्रमण कर चुके हैं, जो इसे क्षेत्रीय स्तर पर विज्ञान और शिक्षा का एक प्रभावी केंद्र सिद्ध करता है। उन्होंने बताया कि देशभर से आए प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए इस सम्मेलन की केंद्रीय थीम “विज्ञान केंद्रों का भविष्य” है
यू-कॉस्ट के महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत ने अपने शुरूआती संबोधन में विज्ञान और नवाचार को शिक्षा, शोध, नीति और समाज से जोड़ने वाले एक सशक्त एवं समावेशी मॉडल की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि युवाओं को केवल विज्ञान का उपभोक्ता नहीं, बल्कि वैश्विक नवाचार का नेतृत्वकर्ता बनाना समय की मांग है। उन्होंने बतया कि उत्तराखण्ड देश का प्रथम राज्य बनने जा रहा है जहाँ इसके प्रत्येक 13 जिलों में विज्ञान केन्द्र की स्थापना की जा रही है एवं शीघ्र ही चम्पावत में यह केन्द्र बनकर तैंयार हो जायेगा। सम्मेलन का उद्घाटन उत्तराखंड के माननीय मुख्यमंत्री द्वारा किया गया।
वीडियो सन्देश के माध्यम से अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि विज्ञान केंद्र आज केवल प्रदर्शनी स्थल नहीं रहे, बल्कि नवाचार, अनुभवात्मक शिक्षण और वैज्ञानिक सोच के सशक्त केंद्र बन चुके हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का संकल्प है कि विज्ञान प्रत्येक जनपद तक पहुँचे, ताकि पर्वतीय एवं दूरस्थ क्षेत्रों का हर युवा विज्ञान से सशक्त हो सके। मानसखण्ड विज्ञान केंद्र और महिला प्रौद्योगिकी पार्क जैसी पहलें विज्ञान को जन-आंदोलन और आत्मनिर्भरता का माध्यम बना रही हैं।
इस अवसर में अपने संबोधन में एन०सी०एस०एम० के डिप्टी डायरेक्टर जनरल श्री अनुराग कुमार द्वारा दिया गया एवं इस सम्मलेन के मुख्य बिन्दुओं पर संक्षिप्त जानकारी दी एवं कहा कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण को समाज की प्रगति की आधारशिला बताते हुए कहा गया कि विज्ञान संग्रहालय आज वैज्ञानिक संवाद, नवाचार और अनुभवात्मक शिक्षण के प्रभावी केंद्र के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। साथ ही यह भी रेखांकित किया गया कि सहयोग और सामूहिक प्रयासों से विज्ञान को जन–जन तक पहुँचाकर भविष्य के लिए एक जागरूक, जिज्ञासु एवं नवाचार–समृद्ध समाज का निर्माण किया जा सकता है।
सम्मेलन में देशभर से लगभग 50 से अधिक विज्ञान संग्रहालयों एवं विज्ञान केंद्रों के निदेशक/प्रमुख, विभिन्न राज्यों के वरिष्ठ प्रतिनिधि, वैज्ञानिक, नीति-निर्धारक एवं अन्य गणमान्य अतिथि भाग ले रहें हैं। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं सांसद माननीय अजय टम्टा ने अपने संबोधन में कहा कि डिजिटल प्रौद्योगिकी, नवीकरणीय ऊर्जा और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में स्वदेशी नवाचार वैज्ञानिक दृष्टिकोण का परिणाम हैं। उन्होंने वर्ष 2027 के विज़न को ध्यान में रखते हुए इन उपलब्धियों को प्रयोगशालाओं से निकालकर समाज के हर वर्ग तक पहुँचाने और विज्ञान संग्रहालयों को पारंपरिक प्रदर्शनों से आगे बढ़कर नवाचार के जीवंत केंद्र के रूप में विकसित करने पर जोर दिया।
उद्घाटन सत्र के दौरान विशिष्ट अतिथियों में क्रमशः श्री अंशुल सिंह, जिलाधिकारी अल्मोड़ा, डॉ० लक्ष्मीकान्त, निदेशक, VPKAS एवं डॉ० आई० डी० भट्ट, गो० ब० पन्त राष्ट्रीय हिमालय संस्थान कोसी, अल्मोड़ा ने भी अपने संबोधन में इस राष्ट्रीय सम्मलेन को उत्तरखंड के लिए विज्ञान एवं तकनीकी की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। वक्ताओं ने कहा कि यह सम्मेलन विज्ञान संग्रहालयों को पारंपरिक प्रदर्शनी स्थलों से आगे बढ़ाकर उन्हें ज्ञान, नवाचार, अनुसंधान और युवा नेतृत्व के सशक्त राष्ट्रीय केंद्रों के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक निर्णायक पहल सिद्ध होगा। इस तीन दिवसीय सम्मेलन के दौरान विज्ञान संग्रहालयों की बदलती भूमिका, डिजिटल एवं इंटरैक्टिव तकनीकों का उपयोग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित आधुनिक प्रदर्शन, विज्ञान संचार के नवाचारी मॉडल तथा बच्चों और युवाओं को विज्ञान से जोड़ने के भविष्य-उन्मुख उपायों पर गहन विचार-विमर्श किया जाएगा।
उद्घाटन सत्र का समापन यू-कॉस्ट, उत्तराखंड सरकार के इमेरिट्स वैज्ञानिक डॉ० गिरीश नेगी द्वारा प्रस्तुत धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। तीन दिवसीय इस सम्मेलन के अंतर्गत कुल चार तकनीकी सत्र आयोजित किए जायेंगे।