चितई में राज्य जैविक केंद्र की प्रशिक्षु महिलाओं का शैक्षिक भ्रमण, जैविक ईंधन निर्माण की दी गई जानकारी
Almora-चितई (अल्मोड़ा)। राज्य जैविक केंद्र मजखाली, रानीखेत में प्रशिक्षण प्राप्त कर रही जनपद टिहरी, रुद्रप्रयाग, चंपावत, पौड़ी एवं उधम सिंह नगर की लगभग 60 से 65 महिलाओं ने आज चितई गांव का शैक्षिक भ्रमण किया। इस अवसर पर महिलाओं को जैविक कृषि के साथ-साथ जैविक ईंधन (बायोडिग्रेडेबल पिरूल के कोयले) के निर्माण की विस्तृत जानकारी दी गई।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में लता कांडपाल ने महिलाओं को पिरूल (चीड़ की सूखी पत्तियों) से जैविक ईंधन तैयार करने की विधि समझाई। उन्होंने बताया कि यह प्रशिक्षण उन्होंने महिला हाट के सहयोग से गोविंद बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान में प्राप्त किया है। श्रीमती कांडपाल अब तक अनेक महिलाओं को बायोडिग्रेडेबल पिरूल का कोयला बनाने का प्रशिक्षण दे चुकी हैं।
उन्होंने बताया कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य जंगल की आग की घटनाओं को रोकना तथा स्थानीय स्तर पर स्वच्छ और जैविक ईंधन उपलब्ध कराना है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि चितई स्थित अपने आउटलेट से वे इस जैविक ईंधन की बिक्री भी कर रही हैं। उन्होंने सभी महिलाओं से इस उपयोगी पहल को अपनाने का आह्वान किया।
पांचों जनपदों से आई महिलाओं ने इस नवाचार की सराहना करते हुए इसे अत्यंत प्रेरणादायक बताया। भ्रमण के दौरान सभी महिलाओं ने चितई स्थित प्रसिद्ध गोलू देवता मंदिर में दर्शन भी किए। प्रतिभागियों के अनुसार यह शैक्षिक भ्रमण तथा श्रीमती लता कांडपाल द्वारा दिया गया प्रशिक्षण अत्यंत यादगार और ज्ञानवर्धक रहा।
कार्यक्रम में राज्य जैविक केंद्र के प्रभारी डॉ. देवेंद्र नेगी, सुमन तथा महिला हाट के समन्वयक राजू कांडपाल भी उपस्थित रहे।