मटेला में कुमाऊँनी भाषा में चल रही श्रीमद्भागवत कथा का तीसरा दिन संपन्न, कथा के बाद पारंपरिक झोड़ा नृत्य ने बांधा समां
मटेला (अल्मोड़ा)। ग्राम सभा मटेला में आरटीओ कार्यालय के समीप स्थित माता के मंदिर में आयोजित कुमाऊँनी भाषा की श्रीमद्भागवत कथा का तीसरा दिन श्रद्धा, भक्ति एवं उत्साह के साथ संपन्न हुआ।
कथा के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण की महिमा का श्रवण किया। कार्यक्रम के समापन पर पारंपरिक कुमाऊँनी झोड़े गाए गए और झोड़ा नृत्य के माध्यम से उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति की सुंदर झलक देखने को मिली। धार्मिक आयोजन में भक्ति और लोकसंस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिला।
आयोजकों का उद्देश्य धार्मिक आस्था को बढ़ावा देने के साथ-साथ कुमाऊँनी भाषा, लोकगीतों, पारंपरिक नृत्य एवं पहाड़ की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करना है। कुमाऊँनी भाषा में कथा का आयोजन स्थानीय बोली और परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुँचाने की दिशा में भी एक सराहनीय पहल है।
आयोजकों ने समस्त क्षेत्रवासियों से आगामी कथा कार्यक्रमों में शामिल होकर धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन की शोभा बढ़ाने की अपील की।