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पेलैग फाउंडेशन द्वारा बागेश्वर जनपद में वन पंचायतों के सशक्तीकरण, आत्मनिर्भरता एवं सतत आजीविका संवर्धन की दिशा में पहल

बागेश्वर, – बागेश्वर जनपद में वन पंचायतों को सशक्त, आत्मनिर्भर एवं आर्थिक रूप से सक्षम बनाने के उद्देश्य से पेलैग फाउंडेशन (Pelag Foundation) द्वारा विभिन्न वन पंचायतों में हितधारकों के साथ बैठकें आयोजित कर एक व्यापक कार्ययोजना तैयार की जा रही है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य वन पंचायतों की संस्थागत क्षमता को मजबूत करना, स्थानीय समुदायों की वन प्रबंधन में प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करना तथा वन पंचायतों को आजीविका के स्थायी एवं विविध अवसरों से जोड़ना है।

पेलैग फाउंडेशन की टीम वर्तमान में प्रभागीय वनाधिकारी (DFO), बागेश्वर के अंतर्गत आने वाली विभिन्न वन क्षेत्रों (Ranges) में वन पंचायतों के सरपंचों, संबंधित वन पंचायत सचिवों, स्थानीय समुदायों एवं अन्य हितधारकों के साथ समन्वय स्थापित कर बैठकें आयोजित कर रही है। इस प्रक्रिया में वन विभाग के अधिकारियों एवं संबंधित कार्मिकों के साथ निरंतर संपर्क एवं सहयोग बनाए रखने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

पांच वर्षीय माइक्रोप्लान निर्माण पर विशेष ध्यान

कार्यक्रम के अंतर्गत उन वन पंचायतों की पहचान की जा रही है, जिनकी पांच वर्षीय सूक्ष्म कार्ययोजना (Five-Year Microplan) अभी तक तैयार नहीं हुई है। ऐसी वन पंचायतों में वन विभाग के सहयोग एवं स्थानीय हितधारकों की सहभागिता से माइक्रोप्लान तैयार करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इन योजनाओं में स्थानीय वन संसाधनों का संरक्षण, जैव विविधता का संवर्धन, वनाग्नि की रोकथाम, जल एवं मृदा संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों का सतत उपयोग तथा स्थानीय समुदायों की आजीविका संबंधी आवश्यकताओं को प्राथमिकता देने का प्रयास किया जा रहा है।

वन पंचायतों की आय बढ़ाने एवं आत्मनिर्भरता के लिए बहुआयामी रणनीति

पेलैग फाउंडेशन का प्रयास है कि वन पंचायतें केवल वन संरक्षण तक सीमित न रहें, बल्कि वे स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों के सतत एवं नियमानुसार उपयोग के माध्यम से अपनी आय बढ़ाने और सामुदायिक विकास में अधिक प्रभावी भूमिका निभाने में सक्षम बनें। इसी उद्देश्य से वन पंचायतों को विभिन्न सरकारी विभागों की विकास योजनाओं, आजीविका कार्यक्रमों एवं संभावित वित्तीय सहायता के अवसरों से जोड़ने के लिए एक विस्तृत रणनीति तैयार की जा रही है।

प्रस्तावित कार्ययोजना में निम्नलिखित विषयों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है:

  1. गैर-काष्ठ वन उत्पाद (NTFP): स्थानीय स्तर पर उपलब्ध वन उत्पादों, जैसे औषधीय एवं सुगंधित पौधों, प्राकृतिक उत्पादों तथा अन्य अनुमत वन उपज के सतत संग्रहण, मूल्य संवर्धन, प्रसंस्करण, पैकेजिंग एवं विपणन की संभावनाओं को विकसित करना।
  2. ईको-टूरिज्म एवं ग्रामीण पर्यटन: स्थानीय प्राकृतिक सौंदर्य, वन संपदा, जैव विविधता एवं पारंपरिक संस्कृति पर आधारित जिम्मेदार पर्यटन गतिविधियों की संभावनाओं का आकलन करना, जिससे स्थानीय युवाओं, महिलाओं एवं वन पंचायतों के लिए आय के नए अवसर विकसित हो सकें।
  3. कार्बन क्रेडिट एवं जलवायु वित्त: वन संरक्षण, वृक्षावरण संवर्धन एवं पारिस्थितिकी सेवाओं के आधार पर कार्बन क्रेडिट तथा अन्य संभावित जलवायु वित्त व्यवस्थाओं से जुड़ने की व्यवहार्यता का अध्ययन करना। इस दिशा में लागू मानकों, तकनीकी आवश्यकताओं, पात्रता एवं संबंधित विभागों के मार्गदर्शन के अनुरूप संभावनाओं का परीक्षण किया जाएगा।
  4. विभागीय योजनाओं से अभिसरण: वन पंचायतों को वन विभाग, ग्राम्य विकास, कृषि, उद्यान, ग्रामीण आजीविका, पर्यटन तथा अन्य संबंधित विभागों की पात्र योजनाओं से जोड़ने के अवसर तलाशना।
  5. क्षमता निर्माण एवं संस्थागत सुदृढ़ीकरण: वन पंचायतों के पदाधिकारियों एवं समुदाय के सदस्यों को माइक्रोप्लान निर्माण, वित्तीय प्रबंधन, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, आजीविका विकास, विपणन तथा सरकारी योजनाओं तक पहुंच के विषय में सक्षम बनाना।
  6. वन पंचायत नियमावली-2026 के प्रस्तावित प्रावधान: वन पंचायत नियमावली-2026 के प्रस्तावित प्रावधानों का अध्ययन करते हुए यह आकलन करना कि उनके संभावित क्रियान्वयन से वन पंचायतों के अधिकारों, जिम्मेदारियों, संसाधन प्रबंधन एवं आर्थिक सुदृढ़ीकरण के लिए कौन-कौन से अवसर विकसित हो सकते हैं। इस संबंध में अंतिम रणनीति लागू नियमावली, सक्षम प्राधिकारियों के निर्देशों एवं प्रचलित कानूनी प्रावधानों के अनुरूप तैयार की जाएगी।

कार्यक्रम प्रबंधक सुश्री तरन्नुम के नेतृत्व में संचालित हो रहा है अभियान

वर्तमान में पेलैग फाउंडेशन की कार्यक्रम प्रबंधक तरन्नुम के नेतृत्व में गठित टीम बागेश्वर जनपद की विभिन्न रेंजों में वन पंचायतों के साथ बैठकें आयोजित कर रही है। टीम स्थानीय परिस्थितियों, वन पंचायतों की आवश्यकताओं, उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों, संस्थागत चुनौतियों तथा संभावित आजीविका अवसरों का आकलन कर रही है। साथ ही, कार्ययोजना को व्यावहारिक एवं प्रभावी बनाने के लिए वन विभाग के साथ निरंतर संवाद और समन्वय किया जा रहा है।

फाउंडेशन का मानना है कि वन पंचायतों की वास्तविक मजबूती तभी संभव है, जब वन संरक्षण, स्थानीय समुदायों की आजीविका, महिलाओं एवं युवाओं की भागीदारी और प्राकृतिक संसाधनों के न्यायसंगत एवं सतत उपयोग के बीच संतुलन स्थापित किया जाए। इस पहल के माध्यम से वन पंचायतों को स्थानीय विकास की सक्रिय इकाई के रूप में विकसित करने तथा उनके दीर्घकालीन संस्थागत एवं आर्थिक सशक्तीकरण की दिशा में ठोस आधार तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है।

पेलैग फाउंडेशन ने विश्वास व्यक्त किया है कि वन विभाग, वन पंचायतों के निर्वाचित प्रतिनिधियों, स्थानीय समुदायों एवं अन्य संबंधित विभागों के सहयोग से यह पहल बागेश्वर जनपद में सामुदायिक वन प्रबंधन को अधिक सहभागी, परिणामोन्मुखी एवं आजीविका-केंद्रित बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है।

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