उत्तराखंड के मित्रों के नाम चिट्ठी
शुभ स्थान - अल्माड़
भादो 4 पैट, वृहस्पतिवार
20 अगस्त,2026
सिद्धीश्री सर्वोपमा योग्यवर-6
आमा-बुबू, ठुल ईजा-ठुल बौज्यू, कका-काकी,ममा-मामी और सबै ठुला कैं म्येरि पैला और ननां कैं प्यार आशीष।
उत्तराखंड में अघिल साल विधान सभा चुनाव छन। नेता लोग आपुण टिकटा चक्कर में एक पार्टी बटी दुसार पार्टी में भजाभाज करण रयीं। जो बेली तक मोदी ज्यू कैं गाई ठोकछी। उ रातों रात मोदी ज्यू भक्त है गयीं। जनूकैं लागूं कि मोदी ज्यू पार्टी में टिकट मिलणी नहां। उ द्वि दिन पैली मोदी ज्यू कैं भगवान बताण रछी। आब मोदी ज्यू लिजी अंट-शंट बकण रयीं। कुछ लोग सांसद निधि और विधायक निधि ठ्याक मिलणा चक्कर में लै आपुण पार्टी बदलण रयीं। नेता लोग आपुण हाईकमान कैं खुशि करण में लागि रयीं। पैली बटी गाई ठोकछी कद्दू में गया। उ कद्दू यानी गद्दू 100 रुपै किलो बिचाण रौ। पहाड़ि लौकि, पहाड़ि गद्दू और दुसार-तिसार साग खूब महंग बिचाण रयीं। ठेकदार माथ माथै पचकै जाणी। काश्तकार कै क्ये नि पटण रौय।
उत्तराखंड में लोक संस्कृति बचाओ, लोकगीत और लोक भाषा कैं बचाओ कै लोग अभियान चलाण रयीं। पढ़ी-लिखी लोग आपुण भाषणों में लोक भाषा और लोकगीत बचाओ जरूर कूनी। पर आपुण नना कैं अंगरेजी सिखाण में लागि रयीं। पहाड़ा लोक द्याप्त छाई-छाई पर्च दिनी। जौ जागर और पहाड़ा द्याप्तालं पहाड़ै पिछाण धरि रै। जौ जागर और बैसी नाम पर आजि लै लोग देस-परदेस बटी पहाड़ उनी। द्यप्तै पुज में आजि लै लोग मिलि-जुलि बे मंदिर में हलु-पुरि, साग-पात बणाण रयीं। बांकी ब्या-काज और पिपो पाणि में लै आज भोउ लोग टेंट वाल कैं ठ्याक दि दिणी। पर लोक द्यप्तां नाम पर लोग गौंनू पन आजि लै हलु और दुसर प्रसाद खुदै बनाण रयीं। हमर गौंक सभापति ज्यू कूणी कि पहाड़ा लोक गीत, लोक संस्कृति और लोक भाषा दगाड़ पहाड़ा लोक द्याप्त लै खत्र में छन। पैली बटी सब लोग पहाड़ पन ग्वेल ज्यू, हरज्यू,कत्यूर,कालिका, सैम,देवि और आपुण घरा इष्टा थान बणाछी। गोल ज्यू, कालिका और दुसार-तिसार द्याप्तांकि एक है एक मूर्ति बणाछी। शिव ज्यू, राम ज्यू, राधा कृष्ण ज्यू मंदिर घरौं पन कमै हूंछी। पैलिया जमान बै हमार पूर्वज जन्माष्टमी, शिवरात्रि व्रत धरनै छी। शिवालय, देवी मंदिर या कृष्ण ज्यू मंदिरों में जानै छी। रामलीला नाम पर राम ज्यू पुज लै करनै छी। इथां कुछ सालौ बटी गौंनू पन राम ज्यू, कृष्ण ज्यू, गणेश ज्यू, राधा कृष्ण ज्यू यानी कलेंडर वाल द्याप्तां थान लै बनाण रयीं। जनूं कैं जो द्यप्ता पर आस्था छू उनार मंदिर बणाओ उनेरि मूर्ति लगाओ भलि बात छू। जो धुणि मे हरज्यू, सैम ज्यू, ग्वेल ज्यू यानी नाचणी वाल लोक द्याप्त छन वेति लोगूंल राम ज्यू,राधा कृष्ण जसै थान बणै बे मूर्ति लगै रयीं। य बात पर विचार करणै जरूरत छू। यानी हमूंकै आपुण लोक द्यप्तां अलग पिछाण बनाणै जरूरत छू। हमार गौंक सभापति ज्यू कूनी कि जागर हमरि संस्कृति छू। य समाज कै जोड़णै एक पहल छू।
आज भोउ घरौं पन घ्वाघ यानी काकुनि खाणै बहार हैरै। आज भोउ सब भुट्टा कै दिणी। ब्याल बखत चुल पन क्वैल में भुनि बे घ्वाघ खाणौ अलगै आनंद छू। आज भोउ क्वे-क्वे लोग कुकर या तौल में उमाई बे लै घ्वाघ खाण रयीं। नान छना ग्वाउ पन भुख लागी तो कच्चै घ्वाघ उसिकै बुकै दिछी। क्वे-क्वे तो कच्चै लौकी फुल्युड़ लै ककड़ै चारी खै दिछी। नान छना ककाड़ चोरि बे खाणौ लै आपुण अलगै आनंछ हूंछ। नान छना लगभग सबै लोगूंल ककाड़ चोरि बे खाई हुनाल। ककाड़ चोेरण में पकड़ी गया तो निगुरि गाई लै लोग ठोकनै छी। हमर गौंक सभापति ज्यू कूनी कि ककाड़ चोरियै गाई नि लागनि कै। बहरहाल घरौं पन ककाड़ चोरण आजि चलियै छू। हरी मर्चो लूण दगाड़ ककड़ौ स्वाद अलगै हूंछ। उसी तो आब जमान बदई गो। पर चोरि बे ककाड़ खाणौ आनंद अलगै छू। हमर गौंक सभापति ज्यू कूनी कि पैली बटी नान तिन खेतों बटी घ्वाघ, ककाड़, रैंसा क्वास और मस्यूर खूब चोरि बे खांछी। आज भोवा जादेत्तर नना पेट हर बखत भरियै रूंछ। सब आपुण नना झ्वाल में बिस्कूट, चिप्स और कुरकुरे धरण रयीं।
पंदर अगस्त हूं गौंक स्कूल में ननाल नाच गीत और ठेठर करै छू। पंदर अगस्ता दिन ननाल प्रभात फेरी लै निकाली। पैली बटी पंदर अगस्त हूं नान आपुण घर बटी तिरंगा बणै बे लिजांछी। आब सब बजार बटी रेडिमेड प्लास्टिका झंड लि जानी। प्रभात फेरी और रैली बाद सब नान-तिन झंड कैं इथां-उथां उसिकै चौट्यै दिनी। य भलि बात नहां। नना कैं झंडा बार में स्कूल में बताई जाण चैं। चौमास में बर्ख पाणि बखत-बखत पर हुणै रै। द्यो वजैल जादेत्तर घरौं पन सीलन हैरै। य वजैल बुड़-बाड़ी आंग चसकन-बिसकन है जाणौ। घरौं पन रामलीलै तालीम चाल हैगे। पंडि ज्यू पातौड़ में जन्यो-पुन्यो 28 अगस्त हूं छू बल। बजार पन एक है एक रक्षा बिचाण रयीं। पंडि ज्यू बजार बटी खरीदि बे जजमानौ कैं जन्यो दिण रयीं। आज बिरूड़ी त्यार और दुर्वाष्टम लै छू। बिरूड़ी त्यार हूं लोग बिरूड़ बनानी। दीदि बैणी दुब और ज्यौड़ लै पहननी। चौमास में स्कूलों में पढ़ाई लै ढिल-ढालै चलि रै। द्यौ है गयो तो डी एम सैप स्कूलै छुट्टी करि दिणी।
आज इतूकै लेखण रयूं। चिट्ठी ठुलि हैगे कै नाराज झन हया। रोज सोचनू कम लेखूल पर मनसुप जसै लागि जानी। चिठ्ठी मिलि के एक आंखर लेखि दीया। आज भोउ सबूं मुबाइल पर अनलिमिटेड प्लान हूंछ। एक आंखर लेखि दिला। तुमर मुबाइल घोइण जै क्ये रौ। चिट्ठी पढ़ि बे भल लागलौ तो इष्ट मितुरौं कै लै शेयर करि दीया। पहाड़ पन आपुण इज-बौज्यू और आम-बुब कै इकलै झन छोड़िया। गौं बाखई पन लोग बहुत मजाक बनानी। मरि बे पिपो पाणि और सराद में पंडि ज्यू कैं दान करि दिया। भलि बात छू। पर ज्यौन जी बुड़-बाड़ी कैं एक घुटुक चहा बखत पर मिलि जाओ, य जुगाड़ करि दिया। आज भोवा ब्वारी सास सौरन कैं जादे मुख नि लगाण राय। शिबौ बुड़-बाड़ि परेशान छन। भोल हमरि लै यसै गत्त होलि य समझि बे बुड़-बाड़ी स्याउ करि दिया। मौसम बदलण रौ। आपण ज्यानै हिफाजत करीया तबै पालना होलि। बांकि फिर लेखूल
तुमर मितुर,
उदय किरौला
संपादक बालप्रहरी
सचिव बालसाहित्य संस्थान
दरबारीनगर अल्मोड़ा उत्तराखंड