कर्नाटक खोला की ऐतिहासिक रामलीला की तालीम कल से होगी प्रारंभ
अल्मोड़ा-श्री रामलीला कमेटी कर्नाटक खोला अल्मोड़ा में आगामी रामलीला मंचन को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं।रामलीला की तालीम का शुभारंभ 15 अगस्त से किया जाएगा।यह जानकारी रामलीला कमेटी के संयोजक एवं वरिष्ठ रंगकर्मी बिट्टू कर्नाटक ने दी।उन्होंने रामलीला में अभिनय करने वाले सभी कलाकारों से निर्धारित समय पर मंच पर पहुंचकर तालीम में प्रतिभाग करने की अपील की है।कर्नाटक खोला की रामलीला अल्मोड़ा की समृद्ध सांस्कृतिक एवं रंगमंचीय परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है।अपने उत्कृष्ट अभिनय, संवाद, संगीत, मंचन और पारंपरिक प्रस्तुतियों के कारण इस रामलीला ने स्थानीय स्तर के साथ-साथ देश-विदेश में भी अपनी अलग पहचान बनाई है। रामलीला का मंचन देखने के लिए हर वर्ष बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों के साथ पर्यटक भी अल्मोड़ा पहुंचते हैं।नई पीढ़ी को संस्कृति से जोड़ने का प्रयास
वरिष्ठ रंगकर्मी एवं संयोजक बिट्टू कर्नाटक ने कहा कि रामलीला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि हमारी लोक संस्कृति, कला, संगीत, अभिनय और सामाजिक परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम है। कर्नाटक खोला की रामलीला की अपनी विशिष्ट पहचान है और इसे निरंतर आगे बढ़ाना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।उन्होंने कहा कि रामलीला के मंच से कलाकारों को अपनी प्रतिभा निखारने का अवसर मिलता है। कई कलाकारों ने इसी मंच से रंगमंच की दुनिया में अपनी पहचान बनाई है। रामलीला की तालीम के दौरान कलाकारों को संवाद अदायगी, अभिनय, गायन, मंच संचालन और पात्रों के अनुरूप भाव-भंगिमाओं का अभ्यास कराया जाएगा।
बिट्टू कर्नाटक ने रामलीला में अभिनय करने वाले सभी कलाकारों से अपील करते हुए कहा कि 15 अगस्त से शुरू होने वाली तालीम में सभी कलाकार अनिवार्य रूप से सायं 5 बजे मंच पर पहुंचें। उन्होंने कहा कि रामलीला का सफल मंचन तभी संभव है, जब सभी कलाकार पूरी निष्ठा, अनुशासन और समर्पण के साथ तालीम में भाग लें।
उन्होंने युवा कलाकारों और नई पीढ़ी से भी रामलीला से जुड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में जब आधुनिक मनोरंजन के अनेक साधन उपलब्ध हैं, ऐसे समय में अपनी पारंपरिक संस्कृति और लोक कला को जीवित रखना बेहद जरूरी है।
कर्नाटक खोला की रामलीला का मंचन देखने के लिए अल्मोड़ा के विभिन्न क्षेत्रों के अलावा अन्य राज्यों और विदेशों से आने वाले पर्यटकों में भी खासा उत्साह रहता है। रामलीला के माध्यम से अल्मोड़ा की सांस्कृतिक विरासत और कुमाऊं की रंगमंचीय परंपरा को व्यापक पहचान मिलती है।रामलीला कमेटी का उद्देश्य इस ऐतिहासिक परंपरा को और अधिक भव्य एवं प्रभावशाली बनाते हुए आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना है। तालीम की शुरुआत के साथ ही कलाकारों और आयोजन से जुड़े लोगों में उत्साह का माहौल है।रामलीला कमेटी कर्नाटक खोला की ओर से लगातार स्थानीय संस्कृति, कला और रंगमंच को बढ़ावा देने के प्रयास किए जा रहे हैं। तालीम की शुरुआत को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आयोजकों को उम्मीद है कि इस वर्ष भी रामलीला का मंचन दर्शकों को आकर्षित करेगा और कर्नाटक खोला की ऐतिहासिक रामलीला अपनी गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाएगी।
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