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उत्तराखंड के मित्रों के नाम चिट्ठी

        शुभ स्थान - अल्माड़    
        अषाड़ 4 पैट, वृहस्पतिवार
         18 जून,2026  

सिद्धीश्री सर्वोपमा योग्यवर-6
आमा-बुबू, ठुल ईजा-ठुल बौज्यू, कका-काकी,ममा-मामी और सबै ठुला कैं म्येरि पैला और ननां कैं प्यार आशीष।
उत्तराखंड में जनगणना काम चलि रौ। एसआरएस काम लै चलि रौ। एसआरएस यानी नमूना पंजीकरण प्रणाली में स्कूला मास्टर लागि रयीं। क्वे-क्वे मासैप और दुसार कर्मचारी तो बहुत परेशान है रयीं। क्वे-क्वे मासैप और कर्मचारी तो डाड़ लै मारि दिणी बल। सुणाई में ऐरै कि उनू कै हटै बे दुसार लोगूं कै य काम में लगै हालौ बल। हमार गौंक सभापति ज्यू कूणी कि सरकार फेल छू। सरकार आपुण कर्मचारियों हूं काम नि करै सकण रयि। उनार जाग में जो मासैप और दुसार कर्मचारी काम करण रयीं। उ य बाता लिजी परेशान छन कि जो लोगों कैं उ काम पर धरि रौ। उ काम नि करण राय। जब काम नि करण रया तो उनूकै सरकार तनखा तो दिणै रै। बहरहाल एसआरएस नाम पर लोग डरन है रयीं। ठुल सैप लै बखत-बखत पर डंड करण रयीं बल।
पहाड़ पन खेति-पाति काम चाल हैगो। अलबेर य समझो चौमास बरै लागि गो। क्वे-क्वे जगां मडु-झुंगौर लोग गोड़ण गयीं। कुछ लोग हुड़की बौल लै लगानै छन। हमार गौंक सभापति ज्यू कूणी कि पैली बटी हुड़की बौल में लोग उसिकै मदद करछी। दिन में हलु-पुरि खवै बे काम चलि जांछी। आब-अबै मजदूरी दिणौ रिवाज चलि गो। पैली बटी खौकी व्यवस्था छी। यानी हुड़की बौल में मदद करणी स्यैणि-मैसौं कैं फसल पाकण पर अनाज देई जांछी। आब नकद ढेपू दिणौ रिवाज हैगो। आब तो पहाड़ पन लोग मजदूरी करण हूं लै तैयार नहां। हमार गौंक सभापति ज्यू कूणी कि पैली बटी लोग खेति-पाति कमै बे साल भर गुजार करछी। तब न तो लोगों पास डबल हूंछी और न दुकानों में नाज पाणि। य वजैल लोग खेति पर जादे ध्यान दिछी। आब लोगों पास डबल हैगो। बजार पन लै राशन मिलनै छू। जब बटी सरकारल कंट्रोल बटी फ्री राशन दिण चाल करि रौ। लोगूं ध्यान खेति-पाति पर नहां। आब घरौं पन खेति-पाति और दुसार-तिसार काम में मजदूरी करण हूं लोग तैयार नहां। किसान पिल्सन लै मिलणै रै।
पहाड़ा गौनू पन ककाड़,तोर्या, लौकि, चिचन और कर्यला लोगूल जामि गयीं। क्वे-क्वे लोगूंल ठंगार घैंटि हाली। जंगोउ बटी डाउ छनकै बे लोग ल्याण रयीं। उ नान वोट कै ठियै बे लोग ठंगार बनानी। क्वे-क्वे लोग घरौं पन रामबांसा डाउ काटि बे लै ठंगार बनानै छन। घरौं पन यदि एका लोगूल दुसरा ठंगार में न्है गयो तो उ ठंगरा साग-पात पर वीकै हक है जां। ठंगार पर लागि तोर्या, चिचन ,ककाड़ और लौकी फूल या फुल्यूड़ पर आंगु लगै बे गिणण लै भल नि मानी जान। ठंगरा पर आंगु लगाण भिंद मानी जां। य मान्यता छू कि आंगु लगै बे गिणण पर तोर्या, लौकि और दुसार-तिसार सागा फुल्यूड़ सड़ि जानी। त्यार-ब्यार या संक्रांति दिन तोर्या पतेल में लगड़ यानी पुरि और बाड़ धरि बे काउ कै दिणौ रिवाज घरौं पन आजि छनै छू। ठंगार पर लागी पैल काकौड़ कैं द्यप्ता थान में चढ़ाणौ रिवाज लै घरौं पन आजि चलियै छू। जो लोगूंल बखत पर ककाड़ और दुसार-तिसार लोगुल बोई रछी। उनार फुल्यूड़ लागि गयीं। बेमौसमी साग-पात पैद करि बे लै लोग बजार पन बेचणै रयीं। सड़का नजिक हरी ककड़ा चिर बणै बे धणियौ लूण लगै बे लै लोग बेचण रयीं।
स्कूली नना छुट्टी है रयीं। सरकारि स्कूलों हालत ठीक नहां। अखबार में छपि रौ कि एक सरकारि स्कूल में 9 नान और 7 मास्टर छन। सरकारि स्कूल बंद हुनै जाणी। सरकार कैं आपुण स्कूलों पर भरोस नहां। सरकारि स्कूला नना कैं सरकार नजिका प्राइवेट स्कूलोें में भेजण रै। प्राइवेट स्कूल में पढ़णी नना फीस लै सरकार भरण रै बल। हमार गौंक सभापति ज्यू कूणी कि सरकार शिक्षा और स्वास्थ्य जसै मूलभूत अधिकारों पर ध्याण दिणा बजाय प्राइवेट अस्पताल और प्राइवेट स्कूलों पर जादे ध्यान दिण रै। य वजैल गरीबौ नना पढ़ाई पर फरक पड़णी छू। घरौं पन अधमास बाद लोग पूज-पाठ,ब्या काजा लगन निकाउण रयीं। अलबेर बखत-बखत पर द्यो हुणै रौ। य वजैल पाणि हकाहक कम हैरै। विधान सभा चुनाव नजिक छन। विधायक और सांसद सांसद निधि और विधायक निधि बटी आपुण-आपुण लोगों कैं स्कीम मंजूर करण रयीं। हमार गौं में पंचैत घर, जन मिलन केंद्र, रामलीला कमेटी भवन छू। सभापति ज्यू 5 लाख रूपै नई जन मिलन केंद्रा लिजी विधायक निधि बटी मंजूर करै ल्यैगी बल। चौमास में बुड़-बाड़िक आंग चसकन-बिसकन है जाणौ।
आज इतूकै लेखण रयूं। चिट्ठी ठुलि हैगे कै नराज झन हया। रोज सोचनू कि कम लेखूल। पर मनसुप जसै लागि जानी। चिट्ठी मिलि गे कै एक आंखर लेखि दीया। आज भोउ सबूं मुबाइल पर अनलिमिटेड प्लान हूंछ। एक आंखर लेखि दिला। तुमर मुबाइल घोइण जै क्ये रौ। चिट्ठी पढ़ि बे भल लागलौ तो इष्ट मितुरौं कै लै शेयर करि दीया। पहाड़ पन आपुण इज-बौज्यू और आम-बुब कै इकलै झन छोड़िया। गौं बाखई पन लोग बहुत मजाक बनानी। मरि बे पिपो पाणि और सराद में पंडि ज्यू कैं दान करि दिया। भलि बात छू। पर ज्यौन जी बुड़-बाड़ी कैं एक घुटुक चहा बखत पर मिलि जाओ, य जुगाड़ करि दिया। आज भोवा ब्वारी सास सौरन कैं जादे मुख नि लगाण राय। शिबौ बुड़-बाड़ि परेशन छन। भोल हमरि लै यसै गत्त होलि य समझि बे बुड़-बाड़ी स्याउ करि दिया। मौसम बदलण रौ। आपुं समझदार छा। आपण ज्यानै हिफाजत करीया तबै पालना होलि। बांकि फिर लेखूल
तुमर मितुर,
उदय किरौला
संपादक बालप्रहरी
सचिव बालसाहित्य संस्थान
दरबारीनगर अल्मोड़ा उत्तराखंड

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