Shakti Samachar Online

उत्तराखंड के मित्रों के नाम चिट्ठी

         शुभ स्थान - अल्माड़
         वैशाख 3 पैट, वृहस्पतिवार
         16 अप्रैल,2026  

सिद्धीश्री सर्वोपमा योग्यवर-6
आमा-बुबू, ठुल ईजा-ठुल बौज्यू, कका-काकी,ममा-मामी और सबै ठुला कैं म्येरि पैला और ननां कैं प्यार आशीष।
14 अप्रैल हूं प्रधानमंत्री ज्यू देहरादून ऐ रछी। सुणाई में ऐरै कि आब देहरादून बटी दिल्ली नजीक हैगो। भलि बात छू पर गैरसैण दूर होते जाण रौ। विधायकों कैं गैरसैण में जुकाम लागि जाणौ बल। हमार गौंक सभापति ज्यू कूणी कि दिल्ली सड़क दगड़ै पहाड़ा सड़कों कैं लै भाल बनाओ। अल्माड़ बटी हल्द्वाणि जाण में जाग जगां जाम लागि जाण रौ। हमार गौंक सभापति ज्यू कूणी कि प्रधानमंत्री ज्यू कैं य लै जरूर बतै दियो कि अलबेर पहाड़ा बहुतै सरकारि स्कूल बंद है गयीं। शिक्षा विभाग में जिला शिक्षा अधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी, उप शिक्षा अधिकारी और संकुल प्रभारी जसै लोग तनखा लिण रयीं। स्कूल बंद किलै हुणी उनेरि लै जिम्मेदारी तय करो। शिक्षा मंत्री ज्यू काम केवल देहरादून में नियुक्ति पत्र और ट्रांसफर औडर बांटणौ नि हुण चैन। सरकारि स्कूल बंद हुण रयीं तो शिक्षा मंत्री कैं उ स्कूलों बार में लै सोचण चैं। सभापति ज्यू कूणी कि नेपाल में आब सबूं नान सरकारि स्कूल में पढ़णी छन। हमार उत्तराखंड में सैप लोगों नान पब्लिक स्कूल में पढ़ण रयीं। य लिजी उनर ध्यान स्कूलों उज्याणि नहां। सरकारि स्कूलों में प्रधानाचार्य नहां। अल्माड़ जिल्ल में 145 इंटर कालेजों में केवल द्वि कालेजों में प्रधानाचार्य छन कै अखबार में खबर छपि रै। शिक्षा मंत्री, शिक्षा सचिव, शिक्षा निदेशक और दुसार सैप क्ये बातै तनखा खाण रयीं। य बात पर लै बात हुण चैं।
पहाड़ौ पन आज भोउ गैस सिलेंडरै कै क्वीड़ चलि रयीं। द्वरहाट साल्दे बिखोती कौतिक में गैस सिलेंडर पर नई झ्वाड़ चलि रौ- ‘सिलेंडर नि मिल हो दाज्यू, चुल में फूका फुक, आदु रात बै लैन लागि रै, मन में धुका धुक’। द्वरहाट में अलबेर रातौ कौतिक बिखोती में 14 जोड़ी नगार और साल्दे कौतिक में 27 गौंनू लोग आपुण गौं नागौर दगाड़ कौतिक में ऐ रछी। द्वरहाट में पुर चैत में लोग आपुण-आपुण गौं में झ्वाड़ कूनी साल्दे कौतिक में एक है एक झ्वाड़ सुणण में उनी। पलायन पर एक झ्वौड़ छी- ‘च्याल ब्वारियां दिल्ली न्है गयीं, इकलै रैगो बुड़, खेति पाती बंजर पड़िगे, बांज पड़िगो कुड़’, कंट्रोल बटी फ्री राशन मिलण पर झ्वौड़ चलि रछी- ‘कंट्रोल में ग्यू ऐ रयीं, छोडि दे हेमा खेति, सरकार दिरै फ्री राशन,छोड़ि दे हेमा खेति।’, गौंनूं पन पाणि समस्या पर लै लोगूंल झ्वाड़ कयै छन, ‘घर-घरौं में नल लागि रैं, पाणी की हैरै पट्ट, गुणि बानरा जै लागनी, खेति पाती चौपट्ट।’
एक पुराण किस्स छू कि द्वोर्याव आपुण बल्द बेचि बे लै साल्दे कौतिक देखणा लिजी जां। य किस्स आब केवल किस्सै रैगो। *जादेत्तर लोग नौकरी लिजी भ्यार न्है गयीं। महंगाई और बेरोजगारी में कौतिका नाम पर लोग उसिकै परेशान है जानी। कौतिक में नान तिना लिजी नई लुकुड़, नान तिना कैं कौतिकौ खर्च लै दिणै पड़ूं य वजैल *आब देस-परदेस बटी लोग कौतिक उण है पैली आपुण खलेत यानी जेबा डबलौ गाणि-माणि लगै लिनी*। कुछ साल पैली साल्दे-बिखोती कौतिक कम है गछी। कुछ साल बटी नई पीढ़ी जागरूक लौंड-मौंड आपुण संस्कृति कै बचाणा लिजी लागि रयीं। गौंनूं में झ्वाड़ हुण रयीं। कौतिक में नगार निसाणौ संख्या लै बड़ण रै। कुछ लोग कूनी कि सरकार बटी नगार लिसाण लिजाणा लिजी ढेपू मिलण रयीं। य वजैल नगार बढ़तै जाणी। हमार गौंक सभापति ज्यू कूणी कि एक गौं बटी नगार उठाड़ में लगभग 10 हजार रूपै लागनी। वी बाद लै नगार बजाणी लोग नहां। चौखुटी गेवाड़ और दूर-दूर बटी नगार बजाणी कलाकार उनी। जब गौं बटी नागौर उठौल तो लोग आपुण गौं इज्जतै लिजी कौतिक में उनै छन। सरकार 4 या पांच हजार रूपै मंजूर लै करीं तो एक द्वि साल में कै बखत सरकारि डबल मिलाल य पत्त नहां। सभापति ज्यू कूनी कि नई पीढ़ी लोग आपुण संस्कृति कैं बचाणा लिजी लागि रयीं। *येति बूंंगा गौं में ब्याल हूं झ्वाड़ कुणी लगभग 200 लोग है जानी। बुंगा गौं सब लोग और उनार च्येलि बेटी साल्दे बिखोति हु आपुण गौं में उनी।* हमार गौंक सभापति ज्यू कूणी कि द्वरहाट में सरंकार यानी छोलिया नृत्य लै अलगै किस्मौ हूंछ। कुमाऊं दुसार इलाकौ में छोल्यार ढोल दमु दगाड़ नाच करनी। कलाकार आंख मटकै-मटकै बे श्रंगार रस में छोलिया नृत्य करनी। जबकि द्वरहाट में हुणी सरंकार यानी छोलिया नृत्य वीर रस पर आधारित हूं येति कलाकार राजसी ठाट-बाट में आपुण युद्ध कौशल कै दिखानी। येति छोल्यार सरंकार नागौर और दमुवै ताल पर नृत्य करनी। दुसार इलाका छोलिया नृत्य वालों एक टीम हूंछ,उ बखत-बखत पर आपुण कलाकारी अलग अलग जगां दिखानी। जबकि द्वराहाट में सरंकार यानी छोलिया नृत्य जादेत्तर कलाकार शौकिया हुनी। आपुण नौकरी और काम दगाड़ उ खेल कौतिकौं में आपुण कलाकारी दिखानी।
पहाड़ा दुकानों में ताश पैली जसै लोग खेलनै छन। गुच्छी खई सब बंद है गयीं। गोरू ग्वाउ पन हम लोग ब्योली और ब्यौल वाल खेल खैलछि। आब सारै खेल मुबाइल पर चलि रयीं। नान तिनां कै झप्याट या भूत मसाण लागणै रौ। माल बाखई हिरदा ब्याल बखत बभूत लगै बे खिचड़ि दिणै रौ। पैली बटी शेरू लंबू लै बभूत लगांछी। उ ब्याल बखत घुटुक घाटुक लगै बे टोली जाणौ। हिरदा बभूत लगै बे सब छाउ है जाणीं। घरौं पन हिसाउ किलमौड़ पर फूल लागि रयीं।
आज इतूकै लेखण रयूं। चिट्ठी ठुलि हैगे कै नराज झन हया। रोज सोचनू कि कम लेखूल। पर मनसुप जसै लागि जानी। चिट्ठी मिलि गे कै एक आंखर लेखि दीया। आज भोउ सबूं मुबाइल पर अनलिमिटेड प्लान हूंछ। एक आंखर लेखि दिला। तुमर मुबाइल घोइण जै क्ये रौ। चिट्ठी पढ़ि बे भल लागलौ तो इष्ट मितुरौं कै लै शेयर करि दीया। पहाड़ पन आपुण इज-बौज्यू और आम-बुब कै इकलै झन छोड़िया। गौं बाखई पन लोग बहुत मजाक बनानी। मरि बे पिपो पाणि और सराद में पंडि ज्यू कैं दान करि दिया। भलि बात छू। पर ज्यौन जी बुड़-बाड़ी कैं एक घुटुक चहा बखत पर मिलि जाओ, य जुगाड़ करि दिया। आज भोवा ब्वारी सास सौरन कैं जादे मुख नि लगाण राय। शिबौ बुड़-बाड़ि परेशन छन। भोल हमरि लै यसै गत्त होलि य समझि बे बुड़-बाड़ी स्याउ करि दिया। मौसम बददलण रौ। आपण ज्यानै हिफाजत करीया तबै पालना होलि। बांकि फिर लेखूल
तुमर मितुर,
उदय किरौला
संपादक बालप्रहरी
सचिव बालसाहित्य संस्थान
दरबारीनगर अल्मोड़ा उत्तराखंड

error: Content is protected !!