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जागेश्वर विधानसभा के कई क्षेत्र पानी खरीद कर पीने को मजबूर 4 साल में भी योजना नहीं हुई पूरी, पानी न मिलना ‌सरकार की लापरवाही- कुंजवाल

अल्मोड़ा- जागेश्वर विधानसभा क्षेत्र के स्थानीय ग्रामीण लोगों द्वारा बैठक में निर्णय लिया गया पूर्व कांग्रेस की सरकार ने जागेश्वर विधान सभा के अन्तर्गत तीन छोटी पंपिंग योजनाएं स्वीकृत थी लेकिन चुनाव शुरू होने के कारण तत्कालीन सरकार ने इन योजनाओं मैं टेण्डर नही लगा पायी भाजपा की वर्तमान सरकार ने लगभग चार- पांच साल पहले इन तीनों योजनाओं में टेंडर आमन्त्रित करके निर्माण कार्य प्रारम्भ करने के आदेश हो गये थे। जागेश्वर के वर्तमान विधायक मोहन सिंह मेहरा ने. इन योजनाए का शिलान्यास करवाकर कार्य प्रारम्भ करवा दिया था।लेकिन -चार वर्ष पूर्ण होने पर भी इन में से किसी भी -‘योजना में पानी चलना प्रारम्भ नहीं हुआ है, जागेश्वर के पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल ने जारी बयान में कहा कि फड़का भागा दोवली, मोतिया पत्थर पंपिंग योजना में स्टोर टैंक की यहां जहां बनेगा उसे स्थान से फडका की ओर पडने वाली कुछ गांव में खाली पाइप लाइन बिछी हुए है जबकि नाटाडोल, मोतिया पाथर भांगादौवली वाला क्षेत्र टूरिज्म के रुप मे विकसित होते जा रहा है। यहाँ के स्थाई निवासी रिजॉर्ट वाले पानी खरीद कर अपनी प्यास बुझा रहे है। इस क्षेत्र की सम्पूर्ण जनता पानी के लिए तरस रही है, और बिभाग भी इन पंपिंग योजनाओं को पूर्ण करने के सम्बन्ध में कुछ भी कहने को तैयार नहीं है। यही हाल सकूनीगांड से छडौजा, लमगडा, गोलो महर धूरा संग्रौली, चायखान कफकोट ग्राम समूह को पानी देने के लिए स्वीकृत हुई है लेकिन योजना अभी पूरी नहीं हुई है और विभाग प्रशासन व सरकार उनके जनप्रतिनिधियों की जनता के प्रति घोर उपेक्षा को दर्शाता है।
इन तीनों योजनाओं में टैन्डर के चार साल पूर्ण होने के बाद भी लोगों का पानी न पिलाया जाना भाजपा सरकार की मंशा को प्रदर्शित करता है। सम्वन्धित विभाग की घोर लापरवाही के कारण हजारों की आबादी वाले क्षेत्रों को चार साल से पानी न मिल पाना इस सरकार में विभाग कितनी लापरवाही से कार्य कर रहे है। यह भी भी साफ जाहिर हो रहा है। स्थानीय जनता ने सामूहिक रूप से यह निर्णय लिया है, कुंजवाल ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर पन्द्रह दिन के अन्दर इन तीनों योजनाओं में खर्च किये गये धनराशि व स्वीकृत वजट की धनराशि तथा तीनो योजनाओं में शेष जानकारी के साथ एक निश्चित तिथि के अन्तर्गत कार्य पूर्ण करने का लिखित आश्वासन विभागीय अधिकारी द्वारा नहीं दिया जाता है तो जनता के साथ धरना-प्रदर्शन करेंगे जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन प्रशासन की होगी।

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