जागेश्वर सिविल सोयम वन प्रभाग अल्मोड़ा के तत्वावधान में तेंदुए की गतिविधियों को देखते हुए निरंतर विभागीय टीम और क्यूआरटी सदस्यों द्वारा गश्त की जा रही है
Almora-जागेश्वर (सिविल सोयम वन प्रभाग अल्मोड़ा) के तत्वावधान में वर्तमान समय में बढ़ रही तेंदुए की गतिविधियों को देखते हुए निरंतर विभागीय टीम और क्यूआरटी सदस्यों द्वारा गश्त की जा रही है। प्रातः, सायं और रात्रि में गश्त करवाई जा रही है। जहाँ भी तेंदुए की गतिविधियों की सूचना मिल रही है, वहाँ सघन गश्त कर ट्रैप कैमरे लगाए जा रहे हैं। साइटिंग, पगमार्क और स्ट्रैक आदि लक्षणों के दिखाई देने पर तेंदुए की गतिविधियां स्पष्ट होने के बाद संबंधित स्थानों में औपचारिकताएं पूरी करने के बाद विधिवत पिंजरे लगाए जा रहे हैं। इस क्रम में अभी तक धौला देवी ब्लॉक के अंतर्गत सैली और धौला चितौला में पिंजरे लगाए गए हैं। जहाँ भी इस प्रकार की

गतिविधियां दिखाई देती हैं, उन क्षेत्रों की पुष्टि होने के बाद उच्च अधिकारियों से प्राप्त आदेशों के तहत वहाँ भी पिंजरे लगवाए जाएंगे। इस संबंध में विभाग द्वारा बार-बार गाँव में सावधानियां बरतने और क्या करें, क्या न करें, इसके बारे में अवगत करवाया जा रहा है। ध्वनि विस्तारक यंत्र के माध्यम से स्थान-स्थान पर ग्रामवासियों को आगाह किया जा रहा है, परंतु कुछ गाँव में अपेक्षित सहयोग नहीं मिल पा रहा है। विभाग द्वारा यह भी निर्देशित किया जा रहा है कि सायंकाल में ग्रामवासी बाहर न जाएं। यदि अति आवश्यक हो तो अकेले न जाकर टॉर्च और लाठी लेकर बाहर आएं, परंतु कुछ गाँव में इसका उल्टा देखा जा रहा है। स्वयं मेरे द्वारा दिनांक 8-1-2026 को की गई पेट्रोलिंग में एक गाँव तल्लागैराड़ में परिवार सांय 7 बजे बड़े स्वच्छंदता के साथ निर्भीक होकर आंगन में छोटे बच्चों के साथ अंगेठी में खाना बनाते हुए पाए गए। गाँव के ऊपर बाँज प्रजाति का घना जंगल है। यद्यपि उक्त परिवार को स्वयं तत्काल मेरे व मेरी टीम के द्वारा तुरंत अंदर भेज दिया गया, परंतु इतना प्रचार-प्रसार एवं जागरूक किए जाने के बाद भी इस प्रकार की लापरवाहियां की जा रही हैं, जो कि स्वयं जान जोखिम में डालने का प्रत्यक्ष प्रमाण है। इसी क्रम में दिनांक 8-1-2026 की सायं को रेंज अंतर्गत स्थित जलना अनुभाग के धुरा संगरोली निवासी एक महिला द्वारा जंगल में फिसलने पर लगी चोट को तेंदुए का हमला बता दिया गया। इस प्रकार के असत्य कृत्यों से समाज में भय का माहौल पैदा होता है, जो उचित नहीं है। इसी के साथ स्थानीय जनता के पुनः बंदर पकड़ने हेतु पिंजरे की व्यवस्था के क्रम में रेंज अंतर्गत विभिन्न संवेदनशील गाँवों में पिंजरे लगाने का कार्य भी आरंभ कर दिया गया है, जो कि प्रगति में है।