अंकिता भंडारी हत्याकांड में रिटायर्ड जस्टिस के नेतृत्व में CBI जांच की मांग को लेकर गांधी पार्क, अल्मोड़ा में जनसभा आयोजित
अल्मोड़ा।अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय की मांग को लेकर आज गांधी पार्क, अल्मोड़ा में सर्वदलीय एवं सर्व समाज की एक महत्वपूर्ण जनसभा आयोजित की गई। जनसभा में एक बार फिर दो टूक शब्दों में यह मांग दोहराई गई कि मामले की सीबीआई से जांच कराई जाए और वह जांच किसी सेवानिवृत्त (रिटायर्ड) न्यायाधीश के नेतृत्व में हो, ताकि निष्पक्षता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर कोई प्रश्न न उठे।
सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि अंकित भंडारी हत्याकांड में अब तक की राज्य सरकार द्वारा कराई गई जांच से जनता का भरोसा पूरी तरह उठ चुका है। लगातार सामने आ रहे वीआईपी एंगल, कॉल रिकॉर्डिंग जैसे महत्वपूर्ण साक्ष्यों और परिस्थितिजन्य तथ्यों के बावजूद सरकार का सीबीआई जांच से बचना यह स्पष्ट करता है कि सच्चाई को दबाने और प्रभावशाली लोगों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है।
वक्ताओं ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर सीधा हमला करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री इस गंभीर प्रकरण में स्पष्ट और निर्णायक कदम उठाने के बजाय लगातार मामले को घुमाने और टालने का काम कर रहे हैं। यदि सरकार वास्तव में बेटी अंकित को न्याय दिलाना चाहती है, तो उसे बिना देरी किए केंद्र सरकार को सीबीआई जांच की संस्तुति भेजनी चाहिए।
सभा में यह भी कहा गया कि कल आयोजित रैली में शामिल रहे सभी जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता, अधिवक्ता एवं सर्व समाज के लोग आज भी पूरी मजबूती से मौजूद रहे, जिससे यह साफ है कि यह आंदोलन किसी एक दिन या एक कार्यक्रम तक सीमित नहीं है, बल्कि लगातार आगे बढ़ता हुआ जनआंदोलन बन चुका है।
आज की जनसभा में उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष पी.सी. तिवारी, यूकेडी के केंद्रीय मंत्री गिरीश गोस्वामी, सामाजिक कार्यकर्ता एवं संयोजक विनय किरोला, हाईकोर्ट अधिवक्ता विनोद चंद्र तिवारी, भूपेंद्र सिंह वल्दिया, सुजीत टम्टा, पान सिंह लटवाल, पुष्कर सिंह, पवन सिंह, बार एसोसिएशन की महिला उपाध्यक्ष भावना जोशी, महिला समिति सचिव मंजू पंत, नीमा आर्य,संजय पूना,राजेश पूना,संतोष कुमार,दीपक आर्य सहित अनेक सामाजिक, राजनीतिक एवं अधिवक्ता वर्ग के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
सभा का संयोजन एवं संचालन सामाजिक कार्यकर्ता विनय किरोला द्वारा किया गया। सभी वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि जब तक अंकित भंडारी हत्याकांड में रिटायर्ड जस्टिस के नेतृत्व में सीबीआई जांच की घोषणा नहीं होती और दोषियों को सजा नहीं मिलती, तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा।
अंत में राज्य सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी गई कि यदि शीघ्र ही इस मामले में ठोस और निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की गई, तो यह आंदोलन अल्मोड़ा से निकलकर पूरे उत्तराखंड में और अधिक व्यापक रूप लेगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी।