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पुलिस की सूझबूझ से विफल हुई ‘डिजिटल अरेस्ट’ की बड़ी साजिश; साइबर ठगों के चंगुल से पीड़ित को छुड़ाकर बचाए ₹02 लाख।

बागेश्वर -पुलिस अधीक्षक बागेश्वर, चन्द्रशेखर घोडके के कुशल निर्देशन में जनपद पुलिस द्वारा साइबर अपराधों के विरुद्ध चलाए जा रहे ‘त्वरित रिस्पांस अभियान’ को बड़ी सफलता मिली थाना कपकोट पुलिस ने एक व्यक्ति को 05 घंटे के ‘डिजिटल अरेस्ट’ से मुक्त कराकर ठगे जाने से बचा ली।
दिनांक 02.01.2026 को ग्राम ऐठान (कपकोट) निवासी कल्याण राम को एक अज्ञात नंबर से कॉल आई। कॉल करने वाले ने स्वयं को ‘जम्मू-कश्मीर एटीएस (ATS) अधिकारी’ बताते हुए पीड़ित को डराया कि उनके बैंक खाते का उपयोग पुलवामा हमले के आतंकियों द्वारा हथियार खरीदने में किया गया है। गिरफ्तारी का भय दिखाकर ठगों ने पीड़ित को एक कमरे में बंद कर वीडियो कॉल के जरिए ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर लिया। लगभग 05 घंटे तक चले इस मानसिक उत्पीड़न के दौरान साइबर ठगों ने पीड़ित से उसके बैंक खाते और आधार कार्ड की गोपनीय जानकारी हासिल कर ली थी। जब पीड़ित ने कमरे का दरवाजा नहीं खोला, तो पड़ोसियों ने संदिग्ध स्थिति भांपते हुए थाना कपकोट पुलिस को सूचना दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए थानाध्यक्ष कपकोट, श्री प्रताप सिंह नगरकोटी तत्काल पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने सूझबूझ से कमरा खुलवाकर पीड़ित को ठगों के चंगुल से मुक्त कराया। जिस समय पुलिस मौके पर पहुँची, ठग पीड़ित के दो खातों से लगभग ₹02 लाख ट्रांसफर करने ही वाले थे, जिसे पुलिस ने तत्परता से रुकवा दिया।
पुलिस ने बदहवास पीड़ित की काउंसलिंग की और उन्हें साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक किया। अपनी मेहनत की कमाई सुरक्षित पाकर पीड़ित कल्याण राम और उनके परिजनों ने बागेश्वर पुलिस की कार्यकुशलता की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए आभार व्यक्त किया है।
पुलिस की अपील:
कोई भी सरकारी एजेंसी (CBI, Police, ATS या ED) वीडियो कॉल के जरिए किसी को ‘डिजिटल अरेस्ट’ नहीं करती है और न ही फोन पर पैसों की मांग करती है।
डरे नहीं, सतर्क रहें। ऐसी कोई भी संदिग्ध कॉल आने पर तुरंत अपने नजदीकी थाने या साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर सूचित करें।
अपनी बैंक डिटेल्स, आधार नंबर या ओटीपी (OTP) किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ साझा न करें।

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