Shakti Samachar Online

विशेष प्रकार के मेथी के लड्डू…….

अल्मोड़ा शहर के आसपास अब उतनी ठंड नहीं पड़ती जितनी पहले पड़ती थी। पहले बर्फ़ भी बहुत गिरती थी। लोग शरीर के बाहरी ताप के लिये आग और गर्म कपड़ों का सहारा लेते थे जो अब भी लेते हैं। शरीर के आन्तरिक ताप के लिये विशेष खान पान पर ध्यान देते थे। अपनी आर्थिक स्थिति के अनुसार व्यवस्था करते थे । महिलाएं और सात्विक विचारधारा वाले लोग खान पान पर विशेष ध्यान देते थे।इस प्रकार के लोगों के शरीर को आन्तरिक ताप पहुंचाने के लिए यहाँ के वैद्यों ने ‘ मेथी पाक ‘ , ‘ पुष्ट पाक ‘ तथा ‘ मेथी के लड्डू ‘ बनाने के तरीके सुझाए। मेथी पाक और पुष्ट पाक तो चलन से बाहर हो गए लेकिन मेथी के लड्डू चलन में बने रहे।

अल्मोड़ा चन्द राजाओं की राजधानी थी। राजधानी होने के कारण यहाँ की बाजार व्यवस्था अच्छा होना स्वाभाविक था। वैद्यों की सलाह लेकर मिष्ठान्न विक्रेताओं ने विशेष प्रकार के मेथी के लड्डू बनाये। तब मेथी के लड्डुओं में 36 प्रकार की जड़ी – बूटियाँ मात्रानुसार पड़ती थी। अब यहाँ पर पुरानी वैद्यक व्यवस्था लगभग समाप्त हो गई है तथा मिष्ठान्न विक्रेताओं की वर्तमान पीढ़ी पुरानी पद्धति से मेथी के लड्डू नहीं बनाती है। फिर भी यहाँ के मेथी के लड्डू खाने में स्वादिष्ट होते हैं । दिवाली के तत्काल बाद से होली तक मिष्ठान्न बिक्रेताओं की दुकानों में खूब बिकते हैं। इसके अलावा लोग भी अपने घरों में मेरी के लड्डू बनाते हैं। प्रवासीगण भी यहाँ से मेथी के लड्डू मगाते हैं । मेथी के लड्डू भी यहाँ की सौग़ात मानी जाती है । बूढ़ी स्त्रियाँ और व्यसन रहित पुरुष जाड़ों के दिनों में इसे अवश्य लेते हैं।इन लड्डुओं को अधिक मात्रा में नहीं खाया जाता।वर्तमान में जो मेथी के लड्डू बनाये जाते हैं उसमें भुने मेथी का चूर्ण , भुनि हुई सूजी, आवश्यकता के अनुसार चीनी , मावा तथा लड्डू बनाने के बाद उसमें ड्राइ फूड लगा दिया जाता है। कुछ पुराने मिष्ठान्न विक्रेता खाने वाले गौंद को भूनकर उसका चूर्ण सहित कुछ और भी चीजें भी मेथी के लड्डुओं में डालते थे।

प्रकाश पंत,
वरिष्ठ पत्रकार

error: Content is protected !!